tithika
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Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में जया एकादशी 2038 पारण समय 06:07⁠–⁠18:46, मंगल 16 फ़रवरी

व्रत · समय UTC−3 में

Ipameri में जया एकादशी 2038 कब है?

सोमवार 15 फ़रवरी

माघ शुक्ल एकादशी

स्मार्त · वैष्णव

Ipameri में सोम 15 फ़रवरी का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

मंगलवार 16 फ़रवरी

पारण समय
06:07–18:46
12 घं 39 मि · Tithika की परिपाटी

जया एकादशी का समय: व्रत, पारण

  • सोमवार 15 फ़रवरी
  • 06:06व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • मंगलवार 16 फ़रवरी
  • 06:07–18:46पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंजया एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Ipameri में जया एकादशी सोम 15 फ़रवरी को क्यों है?

जया एकादशी सोम 15 फ़रवरी को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 21:22 रवि से 21:11 तक।

एकादशी 21:11 सोम पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल सोम 15 फ़रवरी को सूर्योदय पर है, 06:06: सोम 15 फ़रवरी। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 21:22 रवि पर, उससे (04:30–06:06) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · मंगल 16 फ़रवरी, 06:07–18:46 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी सोम 15 फ़रवरी 21:11 से मंगल 16 फ़रवरी 20:11 तक है; हरिवासर 02:56 पर पूरा होता है। इसलिए पारण मंगल 16 फ़रवरी को सूर्योदय (06:07) से होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (18:46) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:39 तक, करते हैं।

नियम

माघ शुक्ल एकादशी

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।