tithika
English

Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में जया एकादशी 2022 पारण समय 06:06⁠–⁠10:12, रवि 13 फ़रवरी

व्रत · समय UTC−3 में

Ipameri में जया एकादशी 2022 कब है?

शनिवार 12 फ़रवरी

माघ शुक्ल एकादशी

स्मार्त · वैष्णव

Ipameri में शनि 12 फ़रवरी का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

रविवार 13 फ़रवरी

पारण समय
06:06–10:12
4 घं 6 मि

जया एकादशी का समय: व्रत, पारण

  • शनिवार 12 फ़रवरी
  • 06:05व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • रविवार 13 फ़रवरी
  • 06:06–10:12पारण समयव्रत खोलने का समय
Tithika में खोलेंजया एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Ipameri में जया एकादशी शनि 12 फ़रवरी को क्यों है?

जया एकादशी शनि 12 फ़रवरी को है: एकादशी और द्वादशी दोनों बढ़ी हैं, इसलिए स्मार्त बाद का दिन लेते हैं, और उसका अरुणोदय दशमी से मुक्त है।

दशमी 05:22 तक, अरुणोदय के भीतर; सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 05:22 से 07:57 शनि तक।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 05:22 शुक्र से 07:57 तक।

द्वादशी: 07:57 शनि से 10:12 तक, अपने दिन से लंबी: यह भी बढ़ी है।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं। यह दोनों सूर्योदयों पर है, शुक्र 11 फ़रवरी को 06:05 और शनि 12 फ़रवरी को 06:05। एकादशी (शुक्र 11 फ़रवरी 05:22 से शनि 12 फ़रवरी 07:57 तक) और द्वादशी (शनि 12 फ़रवरी 07:57 से रवि 13 फ़रवरी 10:12 तक) दोनों अपने दिन से लंबी हैं; दोनों बढ़ें तो स्मार्त बाद का दिन लेते हैं: शनि 12 फ़रवरी। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: शुक्र 11 फ़रवरी को दशमी 05:22 तक है, उसके भीतर (04:29–06:05); शनि 12 फ़रवरी को पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · रवि 13 फ़रवरी, 06:06–10:12

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी शनि 12 फ़रवरी 07:57 से रवि 13 फ़रवरी 10:12 तक है; हरिवासर 14:31 शनि पर पूरा होता है। इसलिए पारण रवि 13 फ़रवरी को सूर्योदय (06:06) से होता है।

नियम

माघ शुक्ल एकादशी

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।