Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में जया एकादशी 2019 शुक्र 15 फ़रवरी या शनि 16 फ़रवरी
व्रत · समय UTC−2 में
Ipameri में जया एकादशी 2019 कब है?
स्मार्त
शुक्रवार 15 फ़रवरी
वैष्णव
शनिवार 16 फ़रवरी
माघ शुक्ल एकादशी
Ipameri में शुक्र 15 फ़रवरी का पूरा पंचांगपारण का समय: व्रत कब खोलें?
स्मार्त · शनिवार 16 फ़रवरी
वैष्णव · रविवार 17 फ़रवरी
जया एकादशी का समय: व्रत, पारण
स्मार्त
- शुक्रवार 15 फ़रवरी
-
07:06व्रत आरंभसूर्योदय पर
- शनिवार 16 फ़रवरी
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08:49–19:46पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
वैष्णव
- शनिवार 16 फ़रवरी
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07:07व्रत आरंभसूर्योदय पर
- रविवार 17 फ़रवरी
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06:07–18:45पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Ipameri में जया एकादशी शुक्र 15 फ़रवरी या शनि 16 फ़रवरी को क्यों है?
स्मार्त · स्मार्त परंपरा में जया एकादशी शुक्र 15 फ़रवरी को है: उस दिन सूर्योदय पर एकादशी है। वैष्णव शनि 16 फ़रवरी को व्रत रखते हैं।
दशमी 05:48 तक, अरुणोदय के भीतर; सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 05:48 से 03:32 शनि तक।
एकादशी 03:32 पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी। एकादशी: 05:48 शुक्र से 03:32 तक।
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−2)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।
स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल शुक्र 15 फ़रवरी को सूर्योदय पर है, 07:06: शुक्र 15 फ़रवरी।
वैष्णव अरुणोदय देखते हैं, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट। शुक्र 15 फ़रवरी को दशमी 05:48 तक है, अरुणोदय (05:30–07:06) के भीतर, इसलिए वह एकादशी विद्ध है। एकादशी 03:32 पर समाप्त होती है, इसलिए वैष्णव शनि 16 फ़रवरी को व्रत रखते हैं: शनि 16 फ़रवरी।
व्रत का पारण
स्मार्त · शनि 16 फ़रवरी, 08:49–19:46 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)
पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी शनि 16 फ़रवरी 03:32 से शनि 16 फ़रवरी 23:40 तक है; हरिवासर 08:49 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (19:46) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 09:39 तक, करते हैं।
वैष्णव · रवि 17 फ़रवरी, 06:07–18:45 (त्रयोदशी, सूर्योदय से सूर्यास्त: Tithika की परिपाटी)
द्वादशी रवि 17 फ़रवरी को 23:40 शनि पर, रात में, अरुणोदय (04:31) से पहले समाप्त होती है: रात में समाप्त द्वादशी को Tithika नहीं गिनता, उसकी परिपाटी। द्वादशी न हो तो निर्णयसिंधु पारण त्रयोदशी में कराता है: सूर्योदय (06:07) से सूर्यास्त (18:45) तक, क्योंकि पारण दिन का कर्म है: Tithika की परिपाटी।
नियम
माघ शुक्ल एकादशी
एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।
- स्मार्त
- सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
- वैष्णव
- पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
- व्रत का पारण
- द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।