tithika
English

Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में जया एकादशी 2007 पारण समय 09:53⁠–⁠19:53, सोम 29 जनवरी

व्रत · समय UTC−2 में

Ipameri में जया एकादशी 2007 कब है?

रविवार 28 जनवरी

माघ शुक्ल एकादशी

स्मार्त · वैष्णव

Ipameri में रवि 28 जनवरी का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

सोमवार 29 जनवरी

पारण समय
09:53–19:53
10 घं 0 मि · Tithika की परिपाटी

जया एकादशी का समय: व्रत, पारण

  • रविवार 28 जनवरी
  • 06:57व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • सोमवार 29 जनवरी
  • 09:53–19:53पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंजया एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Ipameri में जया एकादशी रवि 28 जनवरी को क्यों है?

जया एकादशी रवि 28 जनवरी को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 05:07 से 04:03 सोम तक।

एकादशी 04:03 पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी। एकादशी: 05:07 रवि से 04:03 तक।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−2)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल रवि 28 जनवरी को सूर्योदय पर है, 06:57: रवि 28 जनवरी। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 05:07 पर, उससे (05:21–06:57) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · सोम 29 जनवरी, 09:53–19:53 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी सोम 29 जनवरी 04:03 से मंगल 30 जनवरी 03:21 तक है; हरिवासर 09:53 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (19:53) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 09:33 तक, करते हैं; यहाँ यह समय हरिवासर से पहले समाप्त हो जाता है।

नियम

माघ शुक्ल एकादशी

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।