tithika
English

Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में जया एकादशी 1990 पारण समय 07:02⁠–⁠19:50, मंगल 6 फ़रवरी

व्रत · समय UTC−2 में

Ipameri में जया एकादशी 1990 कब है?

सोमवार 5 फ़रवरी

माघ शुक्ल एकादशी

स्मार्त · वैष्णव

Ipameri में सोम 5 फ़रवरी का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

मंगलवार 6 फ़रवरी

पारण समय
07:02–19:50
12 घं 48 मि · Tithika की परिपाटी

जया एकादशी का समय: व्रत, पारण

  • सोमवार 5 फ़रवरी
  • 07:02व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • मंगलवार 6 फ़रवरी
  • 07:02–19:50पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंजया एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Ipameri में जया एकादशी सोम 5 फ़रवरी को क्यों है?

जया एकादशी सोम 5 फ़रवरी को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 23:23 रवि से 21:34 तक।

एकादशी 21:34 सोम पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−2)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल सोम 5 फ़रवरी को सूर्योदय पर है, 07:02: सोम 5 फ़रवरी। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 23:23 रवि पर, उससे (05:26–07:02) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · मंगल 6 फ़रवरी, 07:02–19:50 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी सोम 5 फ़रवरी 21:34 से मंगल 6 फ़रवरी 19:59 तक है; हरिवासर 03:10 पर पूरा होता है। इसलिए पारण मंगल 6 फ़रवरी को सूर्योदय (07:02) से होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (19:50) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 09:36 तक, करते हैं।

नियम

माघ शुक्ल एकादशी

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।