tithika
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Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में जया एकादशी 1971 पारण समय 06:02⁠–⁠18:51, शनि 6 फ़रवरी

व्रत · समय UTC−3 में

Ipameri में जया एकादशी 1971 कब है?

शुक्रवार 5 फ़रवरी

माघ शुक्ल एकादशी

स्मार्त · वैष्णव

Ipameri में शुक्र 5 फ़रवरी का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

शनिवार 6 फ़रवरी

पारण समय
06:02–18:51
12 घं 49 मि · Tithika की परिपाटी

जया एकादशी का समय: व्रत, पारण

  • शुक्रवार 5 फ़रवरी
  • 06:02व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • शनिवार 6 फ़रवरी
  • 06:02–18:51पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंजया एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Ipameri में जया एकादशी शुक्र 5 फ़रवरी को क्यों है?

जया एकादशी शुक्र 5 फ़रवरी को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 22:04 गुरु से 22:28 तक।

एकादशी 22:28 शुक्र पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल शुक्र 5 फ़रवरी को सूर्योदय पर है, 06:02: शुक्र 5 फ़रवरी। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 22:04 गुरु पर, उससे (04:26–06:02) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · शनि 6 फ़रवरी, 06:02–18:51 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी शुक्र 5 फ़रवरी 22:28 से शनि 6 फ़रवरी 23:23 तक है; हरिवासर 04:42 पर पूरा होता है। इसलिए पारण शनि 6 फ़रवरी को सूर्योदय (06:02) से होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (18:51) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:36 तक, करते हैं।

नियम

माघ शुक्ल एकादशी

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।