tithika
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Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में जया एकादशी 1968 पारण समय 11:50⁠–⁠19:49, शनि 10 फ़रवरी

व्रत · समय UTC−2 में

Ipameri में जया एकादशी 1968 कब है?

शुक्रवार 9 फ़रवरी

माघ शुक्ल एकादशी

स्मार्त · वैष्णव

Ipameri में शुक्र 9 फ़रवरी का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

शनिवार 10 फ़रवरी

पारण समय
11:50–19:49
7 घं 59 मि · Tithika की परिपाटी

जया एकादशी का समय: व्रत, पारण

  • शुक्रवार 9 फ़रवरी
  • 07:03व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • शनिवार 10 फ़रवरी
  • 11:50–19:49पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंजया एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Ipameri में जया एकादशी शुक्र 9 फ़रवरी को क्यों है?

जया एकादशी शुक्र 9 फ़रवरी को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 04:12 से 05:39 शनि तक।

अरुणोदय में एकादशी केवल 05:39 तक; फिर द्वादशी। एकादशी: 04:12 शुक्र से 05:39 तक।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−2)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल शुक्र 9 फ़रवरी को सूर्योदय पर है, 07:03: शुक्र 9 फ़रवरी। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 04:12 पर, उससे (05:27–07:03) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · शनि 10 फ़रवरी, 11:50–19:49 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी शनि 10 फ़रवरी 05:39 से रवि 11 फ़रवरी 06:23 तक है; हरिवासर 11:50 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (19:49) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 09:37 तक, करते हैं; यहाँ यह समय हरिवासर से पहले समाप्त हो जाता है।

नियम

माघ शुक्ल एकादशी

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।