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Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में जया एकादशी 1960 पारण समय 06:03⁠–⁠10:13, मंगल 9 फ़रवरी

व्रत · समय UTC−3 में

Ipameri में जया एकादशी 1960 कब है?

सोमवार 8 फ़रवरी

माघ शुक्ल एकादशी

स्मार्त · वैष्णव

Ipameri में सोम 8 फ़रवरी का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

मंगलवार 9 फ़रवरी

पारण समय
06:03–10:13
4 घं 10 मि

जया एकादशी का समय: व्रत, पारण

  • सोमवार 8 फ़रवरी
  • 06:03व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • मंगलवार 9 फ़रवरी
  • 06:03–10:13पारण समयव्रत खोलने का समय
Tithika में खोलेंजया एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Ipameri में जया एकादशी सोम 8 फ़रवरी को क्यों है?

जया एकादशी सोम 8 फ़रवरी को है: एकादशी और द्वादशी दोनों बढ़ी हैं, इसलिए स्मार्त बाद का दिन लेते हैं, और उसका अरुणोदय दशमी से मुक्त है।

दशमी 05:33 तक, अरुणोदय के भीतर; सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 05:33 से 08:01 सोम तक।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 05:33 रवि से 08:01 तक।

द्वादशी: 08:01 सोम से 10:13 तक, अपने दिन से लंबी: यह भी बढ़ी है।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं। यह दोनों सूर्योदयों पर है, रवि 7 फ़रवरी को 06:02 और सोम 8 फ़रवरी को 06:03। एकादशी (रवि 7 फ़रवरी 05:33 से सोम 8 फ़रवरी 08:01 तक) और द्वादशी (सोम 8 फ़रवरी 08:01 से मंगल 9 फ़रवरी 10:13 तक) दोनों अपने दिन से लंबी हैं; दोनों बढ़ें तो स्मार्त बाद का दिन लेते हैं: सोम 8 फ़रवरी। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: रवि 7 फ़रवरी को दशमी 05:33 तक है, उसके भीतर (04:26–06:02); सोम 8 फ़रवरी को पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · मंगल 9 फ़रवरी, 06:03–10:13

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी सोम 8 फ़रवरी 08:01 से मंगल 9 फ़रवरी 10:13 तक है; हरिवासर 14:34 सोम पर पूरा होता है। इसलिए पारण मंगल 9 फ़रवरी को सूर्योदय (06:03) से होता है।

नियम

माघ शुक्ल एकादशी

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।