tithika
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Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में जया एकादशी 1950 पारण समय 06:58⁠–⁠19:53, सोम 30 जनवरी

व्रत · समय UTC−2 में

Ipameri में जया एकादशी 1950 कब है?

रविवार 29 जनवरी

माघ शुक्ल एकादशी

स्मार्त · वैष्णव

Ipameri में रवि 29 जनवरी का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

सोमवार 30 जनवरी

पारण समय
06:58–19:53
12 घं 55 मि · Tithika की परिपाटी

जया एकादशी का समय: व्रत, पारण

  • रविवार 29 जनवरी
  • 06:58व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • सोमवार 30 जनवरी
  • 06:58–19:53पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंजया एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Ipameri में जया एकादशी रवि 29 जनवरी को क्यों है?

जया एकादशी रवि 29 जनवरी को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 20:24 शनि से 21:44 तक।

एकादशी 21:44 रवि पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−2)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल रवि 29 जनवरी को सूर्योदय पर है, 06:58: रवि 29 जनवरी। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 20:24 शनि पर, उससे (05:22–06:58) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · सोम 30 जनवरी, 06:58–19:53 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी रवि 29 जनवरी 21:44 से सोम 30 जनवरी 22:22 तक है; हरिवासर 03:54 पर पूरा होता है। इसलिए पारण सोम 30 जनवरी को सूर्योदय (06:58) से होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (19:53) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 09:33 तक, करते हैं।

नियम

माघ शुक्ल एकादशी

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।