Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में इंदिरा एकादशी 2090 मंगल 19 सितंबर या बुध 20 सितंबर
व्रत · समय UTC−3 में
Ipameri में इंदिरा एकादशी 2090 कब है?
स्मार्त
मंगलवार 19 सितंबर
वैष्णव
बुधवार 20 सितंबर
आश्विन कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · भाद्रपद कृष्ण एकादशी (अमान्त)
Ipameri में मंगल 19 सितंबर का पूरा पंचांगपारण का समय: व्रत कब खोलें?
स्मार्त · बुधवार 20 सितंबर
वैष्णव · गुरुवार 21 सितंबर
इंदिरा एकादशी का समय: व्रत, पारण
स्मार्त
- मंगलवार 19 सितंबर
-
06:04व्रत आरंभसूर्योदय पर
- बुधवार 20 सितंबर
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08:55–18:08पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
वैष्णव
- बुधवार 20 सितंबर
-
06:03व्रत आरंभसूर्योदय पर
- गुरुवार 21 सितंबर
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06:02–18:08पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Ipameri में इंदिरा एकादशी मंगल 19 सितंबर या बुध 20 सितंबर को क्यों है?
स्मार्त · स्मार्त परंपरा में इंदिरा एकादशी मंगल 19 सितंबर को है: उस दिन सूर्योदय पर एकादशी है। वैष्णव बुध 20 सितंबर को व्रत रखते हैं।
दशमी 05:59 तक, अरुणोदय के भीतर; सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 05:59 से 03:39 बुध तक।
एकादशी 03:39 पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी। एकादशी: 05:59 मंगल से 03:39 तक।
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।
स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल मंगल 19 सितंबर को सूर्योदय पर है, 06:04: मंगल 19 सितंबर।
वैष्णव अरुणोदय देखते हैं, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट। मंगल 19 सितंबर को दशमी 05:59 तक है, अरुणोदय (04:28–06:04) के भीतर, इसलिए वह एकादशी विद्ध है। एकादशी 03:39 पर समाप्त होती है, इसलिए वैष्णव बुध 20 सितंबर को व्रत रखते हैं: बुध 20 सितंबर।
व्रत का पारण
स्मार्त · बुध 20 सितंबर, 08:55–18:08 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)
पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी बुध 20 सितंबर 03:39 से गुरु 21 सितंबर 00:45 तक है; हरिवासर 08:55 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (18:08) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:28 तक, करते हैं; यहाँ यह समय हरिवासर से पहले समाप्त हो जाता है।
वैष्णव · गुरु 21 सितंबर, 06:02–18:08 (त्रयोदशी, सूर्योदय से सूर्यास्त: Tithika की परिपाटी)
द्वादशी गुरु 21 सितंबर को 00:45 पर, रात में, अरुणोदय (04:26) से पहले समाप्त होती है: रात में समाप्त द्वादशी को Tithika नहीं गिनता, उसकी परिपाटी। द्वादशी न हो तो निर्णयसिंधु पारण त्रयोदशी में कराता है: सूर्योदय (06:02) से सूर्यास्त (18:08) तक, क्योंकि पारण दिन का कर्म है: Tithika की परिपाटी।
नियम
आश्विन कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · भाद्रपद कृष्ण एकादशी (अमान्त)
एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।
- स्मार्त
- सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
- वैष्णव
- पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
- व्रत का पारण
- द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।