tithika
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Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में इंदिरा एकादशी 2039 मंगल 13 सितंबर या बुध 14 सितंबर

व्रत · समय UTC−3 में

Ipameri में इंदिरा एकादशी 2039 कब है?

स्मार्त

मंगलवार 13 सितंबर

वैष्णव

बुधवार 14 सितंबर

आश्विन कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · भाद्रपद कृष्ण एकादशी (अमान्त)

Ipameri में मंगल 13 सितंबर का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

स्मार्त · बुधवार 14 सितंबर

पारण समय
12:18–18:07
5 घं 49 मि · Tithika की परिपाटी

वैष्णव · गुरुवार 15 सितंबर

पारण समय
06:08–06:55
47 मि

इंदिरा एकादशी का समय: व्रत, पारण

स्मार्त

  • मंगलवार 13 सितंबर
  • 06:10व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • बुधवार 14 सितंबर
  • 12:18–18:07पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी

वैष्णव

  • बुधवार 14 सितंबर
  • 06:09व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • गुरुवार 15 सितंबर
  • 06:08–06:55पारण समयव्रत खोलने का समय
Tithika में खोलेंइंदिरा एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Ipameri में इंदिरा एकादशी मंगल 13 सितंबर या बुध 14 सितंबर को क्यों है?

स्मार्त · स्मार्त परंपरा में इंदिरा एकादशी मंगल 13 सितंबर को है: उस दिन सूर्योदय पर एकादशी है। वैष्णव बुध 14 सितंबर को व्रत रखते हैं।

दशमी 04:35 तक, अरुणोदय के भीतर; सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 04:35 से 06:06 बुध तक।

अरुणोदय में एकादशी केवल 06:06 तक; फिर द्वादशी। एकादशी: 04:35 मंगल से 06:06 तक।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल मंगल 13 सितंबर को सूर्योदय पर है, 06:10: मंगल 13 सितंबर।

वैष्णव

वैष्णव अरुणोदय देखते हैं, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट। मंगल 13 सितंबर को दशमी 04:35 तक है, अरुणोदय (04:34–06:10) के भीतर, इसलिए वह एकादशी विद्ध है। एकादशी 06:06 पर समाप्त होती है, इसलिए वैष्णव बुध 14 सितंबर को व्रत रखते हैं: बुध 14 सितंबर।

व्रत का पारण

स्मार्त · बुध 14 सितंबर, 12:18–18:07 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी बुध 14 सितंबर 06:06 से गुरु 15 सितंबर 06:55 तक है; हरिवासर 12:18 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (18:07) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:32 तक, करते हैं; यहाँ यह समय हरिवासर से पहले समाप्त हो जाता है।

वैष्णव · गुरु 15 सितंबर, 06:08–06:55

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी बुध 14 सितंबर 06:06 से गुरु 15 सितंबर 06:55 तक है; हरिवासर 12:18 बुध पर पूरा होता है। इसलिए पारण गुरु 15 सितंबर को सूर्योदय (06:08) से होता है।

नियम

आश्विन कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · भाद्रपद कृष्ण एकादशी (अमान्त)

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।