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Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में इंदिरा एकादशी 2028 गुरु 14 सितंबर या शुक्र 15 सितंबर

व्रत · समय UTC−3 में

Ipameri में इंदिरा एकादशी 2028 कब है?

स्मार्त

गुरुवार 14 सितंबर

वैष्णव

शुक्रवार 15 सितंबर

आश्विन कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · भाद्रपद कृष्ण एकादशी (अमान्त)

Ipameri में गुरु 14 सितंबर का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

स्मार्त · शुक्रवार 15 सितंबर

पारण समय
10:30–18:07
7 घं 37 मि · Tithika की परिपाटी

वैष्णव · शनिवार 16 सितंबर

पारण समय
06:07–18:08
12 घं 1 मि · Tithika की परिपाटी

इंदिरा एकादशी का समय: व्रत, पारण

स्मार्त

  • गुरुवार 14 सितंबर
  • 06:08व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • शुक्रवार 15 सितंबर
  • 10:30–18:07पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी

वैष्णव

  • शुक्रवार 15 सितंबर
  • 06:07व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • शनिवार 16 सितंबर
  • 06:07–18:08पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंइंदिरा एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Ipameri में इंदिरा एकादशी गुरु 14 सितंबर या शुक्र 15 सितंबर को क्यों है?

स्मार्त · स्मार्त परंपरा में इंदिरा एकादशी गुरु 14 सितंबर को है: एकादशी किसी सूर्योदय पर नहीं है, और क्षय एकादशी उसी दिन रखी जाती है जिस दिन वह चलती है। वैष्णव शुक्र 15 सितंबर को व्रत रखते हैं।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर दशमी; एकादशी 07:25 से। एकादशी: 07:25 से 05:12 शुक्र तक।

अरुणोदय में एकादशी केवल 05:12 तक; फिर द्वादशी। एकादशी: 07:25 गुरु से 05:12 तक।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं। यह गुरु 14 सितंबर को 07:25 पर, उस सूर्योदय (06:08) के बाद, लगती है और शुक्र 15 सितंबर को 05:12 पर, अगले सूर्योदय (06:07 शुक्र) से पहले, समाप्त होती है: यह किसी सूर्योदय पर नहीं है। क्षय एकादशी उसी दिन रखी जाती है जिस दिन वह चलती है: गुरु 14 सितंबर।

वैष्णव

वैष्णव अरुणोदय देखते हैं, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट। गुरु 14 सितंबर को अरुणोदय (04:32–06:08) में दशमी है। शुक्र 15 सितंबर को उसमें दशमी नहीं (एकादशी 05:12 तक, फिर द्वादशी): शुक्र 15 सितंबर।

व्रत का पारण

स्मार्त · शुक्र 15 सितंबर, 10:30–18:07 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी शुक्र 15 सितंबर 05:12 से शनि 16 सितंबर 02:21 तक है; हरिवासर 10:30 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (18:07) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:31 तक, करते हैं; यहाँ यह समय हरिवासर से पहले समाप्त हो जाता है।

वैष्णव · शनि 16 सितंबर, 06:07–18:08 (त्रयोदशी, सूर्योदय से सूर्यास्त: Tithika की परिपाटी)

द्वादशी शनि 16 सितंबर को 02:21 पर, रात में, अरुणोदय (04:31) से पहले समाप्त होती है: रात में समाप्त द्वादशी को Tithika नहीं गिनता, उसकी परिपाटी। द्वादशी न हो तो निर्णयसिंधु पारण त्रयोदशी में कराता है: सूर्योदय (06:07) से सूर्यास्त (18:08) तक, क्योंकि पारण दिन का कर्म है: Tithika की परिपाटी।

नियम

आश्विन कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · भाद्रपद कृष्ण एकादशी (अमान्त)

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।