Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में इंदिरा एकादशी 2024 पारण समय 05:56–08:18, रवि 29 सितंबर
व्रत · समय UTC−3 में
Ipameri में इंदिरा एकादशी 2024 कब है?
शनिवार 28 सितंबर
आश्विन कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · भाद्रपद कृष्ण एकादशी (अमान्त)
Ipameri में शनि 28 सितंबर का पूरा पंचांगपारण का समय: व्रत कब खोलें?
रविवार 29 सितंबर
इंदिरा एकादशी का समय: व्रत, पारण
- शनिवार 28 सितंबर
-
05:56व्रत आरंभसूर्योदय पर
- रविवार 29 सितंबर
-
05:56–08:18पारण समयव्रत खोलने का समय
Ipameri में इंदिरा एकादशी शनि 28 सितंबर को क्यों है?
इंदिरा एकादशी शनि 28 सितंबर को है: एकादशी और द्वादशी दोनों बढ़ी हैं, इसलिए स्मार्त बाद का दिन लेते हैं, और उसका अरुणोदय दशमी से मुक्त है।
दशमी 04:50 तक, अरुणोदय के भीतर; सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 04:50 से 06:20 शनि तक।
पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 04:50 शुक्र से 06:20 तक।
द्वादशी: 06:20 शनि से 08:18 तक, अपने दिन से लंबी: यह भी बढ़ी है।
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।
स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं। यह दोनों सूर्योदयों पर है, शुक्र 27 सितंबर को 05:57 और शनि 28 सितंबर को 05:56। एकादशी (शुक्र 27 सितंबर 04:50 से शनि 28 सितंबर 06:20 तक) और द्वादशी (शनि 28 सितंबर 06:20 से रवि 29 सितंबर 08:18 तक) दोनों अपने दिन से लंबी हैं; दोनों बढ़ें तो स्मार्त बाद का दिन लेते हैं: शनि 28 सितंबर। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: शुक्र 27 सितंबर को दशमी 04:50 तक है, उसके भीतर (04:21–05:57); शनि 28 सितंबर को पूरे अरुणोदय में एकादशी है।
व्रत का पारण
स्मार्त · वैष्णव · रवि 29 सितंबर, 05:56–08:18
पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी शनि 28 सितंबर 06:20 से रवि 29 सितंबर 08:18 तक है; हरिवासर 12:49 शनि पर पूरा होता है। इसलिए पारण रवि 29 सितंबर को सूर्योदय (05:56) से होता है।
नियम
आश्विन कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · भाद्रपद कृष्ण एकादशी (अमान्त)
एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।
- स्मार्त
- सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
- वैष्णव
- पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
- व्रत का पारण
- द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।