Sevan, गेघार्कुनिक प्रांत, आर्मेनिया में इंदिरा एकादशी 2015 पारण समय 07:03–18:30, शुक्र 9 अक्टूबर
व्रत · समय UTC+4 में
Sevan में इंदिरा एकादशी 2015 कब है?
गुरुवार 8 अक्टूबर
आश्विन कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · भाद्रपद कृष्ण एकादशी (अमान्त)
Sevan में गुरु 8 अक्टूबर का पूरा पंचांगपारण का समय: व्रत कब खोलें?
शुक्रवार 9 अक्टूबर
इंदिरा एकादशी का समय: व्रत, पारण
- गुरुवार 8 अक्टूबर
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07:02व्रत आरंभसूर्योदय पर
- शुक्रवार 9 अक्टूबर
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07:03–18:30पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Sevan में इंदिरा एकादशी गुरु 8 अक्टूबर को क्यों है?
इंदिरा एकादशी गुरु 8 अक्टूबर को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।
पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर दशमी; एकादशी 15:39 से।
पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 15:39 बुध से 17:43 तक।
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC+4)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।
स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल गुरु 8 अक्टूबर को सूर्योदय पर है, 07:02: गुरु 8 अक्टूबर। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 15:39 बुध पर, उससे (05:26–07:02) पहले, समाप्त हुई।
व्रत का पारण
स्मार्त · वैष्णव · शुक्र 9 अक्टूबर, 07:03–18:30 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)
पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी गुरु 8 अक्टूबर 17:43 से शुक्र 9 अक्टूबर 20:09 तक है; हरिवासर 00:19 पर पूरा होता है। इसलिए पारण शुक्र 9 अक्टूबर को सूर्योदय (07:03) से होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (18:30) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 09:21 तक, करते हैं।
नियम
आश्विन कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · भाद्रपद कृष्ण एकादशी (अमान्त)
एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।
- स्मार्त
- सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
- वैष्णव
- पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
- व्रत का पारण
- द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।