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Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में इंदिरा एकादशी 2012 पारण समय 05:45⁠–⁠16:42, शुक्र 12 अक्टूबर

व्रत · समय UTC−3 में

Ipameri में इंदिरा एकादशी 2012 कब है?

गुरुवार 11 अक्टूबर

आश्विन कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · भाद्रपद कृष्ण एकादशी (अमान्त)

स्मार्त · वैष्णव

Ipameri में गुरु 11 अक्टूबर का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

शुक्रवार 12 अक्टूबर

पारण समय
05:45–16:42
10 घं 57 मि

इंदिरा एकादशी का समय: व्रत, पारण

  • गुरुवार 11 अक्टूबर
  • 05:46व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • शुक्रवार 12 अक्टूबर
  • 05:45–16:42पारण समयव्रत खोलने का समय
Tithika में खोलेंइंदिरा एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Ipameri में इंदिरा एकादशी गुरु 11 अक्टूबर को क्यों है?

इंदिरा एकादशी गुरु 11 अक्टूबर को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 18:39 बुध से 18:04 तक।

एकादशी 18:04 गुरु पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल गुरु 11 अक्टूबर को सूर्योदय पर है, 05:46: गुरु 11 अक्टूबर। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 18:39 बुध पर, उससे (04:10–05:46) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · शुक्र 12 अक्टूबर, 05:45–16:42

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी गुरु 11 अक्टूबर 18:04 से शुक्र 12 अक्टूबर 16:42 तक है; हरिवासर 23:44 गुरु पर पूरा होता है। इसलिए पारण शुक्र 12 अक्टूबर को सूर्योदय (05:45) से होता है। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:15 तक, करते हैं।

नियम

आश्विन कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · भाद्रपद कृष्ण एकादशी (अमान्त)

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।