tithika
English

Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में इंदिरा एकादशी 1995 पारण समय 06:03⁠–⁠14:24, गुरु 21 सितंबर

व्रत · समय UTC−3 में

Ipameri में इंदिरा एकादशी 1995 कब है?

बुधवार 20 सितंबर

आश्विन कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · भाद्रपद कृष्ण एकादशी (अमान्त)

स्मार्त · वैष्णव

Ipameri में बुध 20 सितंबर का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

गुरुवार 21 सितंबर

पारण समय
06:03–14:24
8 घं 21 मि

इंदिरा एकादशी का समय: व्रत, पारण

  • बुधवार 20 सितंबर
  • 06:04व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • गुरुवार 21 सितंबर
  • 06:03–14:24पारण समयव्रत खोलने का समय
Tithika में खोलेंइंदिरा एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Ipameri में इंदिरा एकादशी बुध 20 सितंबर को क्यों है?

इंदिरा एकादशी बुध 20 सितंबर को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर दशमी; एकादशी 11:48 से।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 11:48 मंगल से 13:23 तक।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल बुध 20 सितंबर को सूर्योदय पर है, 06:04: बुध 20 सितंबर। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 11:48 मंगल पर, उससे (04:28–06:04) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · गुरु 21 सितंबर, 06:03–14:24

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी बुध 20 सितंबर 13:23 से गुरु 21 सितंबर 14:24 तक है; हरिवासर 19:38 बुध पर पूरा होता है। इसलिए पारण गुरु 21 सितंबर को सूर्योदय (06:03) से होता है। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:28 तक, करते हैं।

नियम

आश्विन कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · भाद्रपद कृष्ण एकादशी (अमान्त)

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।