tithika
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Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में इंदिरा एकादशी 1967 शुक्र 29 सितंबर या शनि 30 सितंबर

व्रत · समय UTC−3 में

Ipameri में इंदिरा एकादशी 1967 कब है?

स्मार्त

शुक्रवार 29 सितंबर

वैष्णव

शनिवार 30 सितंबर

आश्विन कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · भाद्रपद कृष्ण एकादशी (अमान्त)

Ipameri में शुक्र 29 सितंबर का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

स्मार्त · शनिवार 30 सितंबर

पारण समय
10:34–18:09
7 घं 35 मि · Tithika की परिपाटी

वैष्णव · रविवार 1 अक्टूबर

पारण समय
05:55–18:10
12 घं 15 मि · Tithika की परिपाटी

इंदिरा एकादशी का समय: व्रत, पारण

स्मार्त

  • शुक्रवार 29 सितंबर
  • 05:57व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • शनिवार 30 सितंबर
  • 10:34–18:09पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी

वैष्णव

  • शनिवार 30 सितंबर
  • 05:56व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • रविवार 1 अक्टूबर
  • 05:55–18:10पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंइंदिरा एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Ipameri में इंदिरा एकादशी शुक्र 29 सितंबर या शनि 30 सितंबर को क्यों है?

स्मार्त · स्मार्त परंपरा में इंदिरा एकादशी शुक्र 29 सितंबर को है: एकादशी किसी सूर्योदय पर नहीं है, और क्षय एकादशी उसी दिन रखी जाती है जिस दिन वह चलती है। वैष्णव शनि 30 सितंबर को व्रत रखते हैं।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर दशमी; एकादशी 06:35 से। एकादशी: 06:35 से 05:07 शनि तक।

अरुणोदय में एकादशी केवल 05:07 तक; फिर द्वादशी। एकादशी: 06:35 शुक्र से 05:07 तक।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं। यह शुक्र 29 सितंबर को 06:35 पर, उस सूर्योदय (05:57) के बाद, लगती है और शनि 30 सितंबर को 05:07 पर, अगले सूर्योदय (05:56 शनि) से पहले, समाप्त होती है: यह किसी सूर्योदय पर नहीं है। क्षय एकादशी उसी दिन रखी जाती है जिस दिन वह चलती है: शुक्र 29 सितंबर।

वैष्णव

वैष्णव अरुणोदय देखते हैं, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट। शुक्र 29 सितंबर को अरुणोदय (04:21–05:57) में दशमी है। शनि 30 सितंबर को उसमें दशमी नहीं (एकादशी 05:07 तक, फिर द्वादशी): शनि 30 सितंबर।

व्रत का पारण

स्मार्त · शनि 30 सितंबर, 10:34–18:09 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी शनि 30 सितंबर 05:07 से रवि 1 अक्टूबर 02:55 तक है; हरिवासर 10:34 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (18:09) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:22 तक, करते हैं; यहाँ यह समय हरिवासर से पहले समाप्त हो जाता है।

वैष्णव · रवि 1 अक्टूबर, 05:55–18:10 (त्रयोदशी, सूर्योदय से सूर्यास्त: Tithika की परिपाटी)

द्वादशी रवि 1 अक्टूबर को 02:55 पर, रात में, अरुणोदय (04:19) से पहले समाप्त होती है: रात में समाप्त द्वादशी को Tithika नहीं गिनता, उसकी परिपाटी। द्वादशी न हो तो निर्णयसिंधु पारण त्रयोदशी में कराता है: सूर्योदय (05:55) से सूर्यास्त (18:10) तक, क्योंकि पारण दिन का कर्म है: Tithika की परिपाटी।

नियम

आश्विन कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · भाद्रपद कृष्ण एकादशी (अमान्त)

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।