tithika
English

Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में इंदिरा एकादशी 1948 पारण समय 05:55⁠–⁠18:10, गुरु 30 सितंबर

व्रत · समय UTC−3 में

Ipameri में इंदिरा एकादशी 1948 कब है?

बुधवार 29 सितंबर

आश्विन कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · भाद्रपद कृष्ण एकादशी (अमान्त)

स्मार्त · वैष्णव

Ipameri में बुध 29 सितंबर का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

गुरुवार 30 सितंबर

पारण समय
05:55–18:10
12 घं 14 मि · Tithika की परिपाटी

इंदिरा एकादशी का समय: व्रत, पारण

  • बुधवार 29 सितंबर
  • 05:56व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • गुरुवार 30 सितंबर
  • 05:55–18:10पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंइंदिरा एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Ipameri में इंदिरा एकादशी बुध 29 सितंबर को क्यों है?

इंदिरा एकादशी बुध 29 सितंबर को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर दशमी; एकादशी 09:22 से।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 09:22 मंगल से 06:30 तक।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल बुध 29 सितंबर को सूर्योदय पर है, 05:56: बुध 29 सितंबर। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 09:22 मंगल पर, उससे (04:20–05:56) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · गुरु 30 सितंबर, 05:55–18:10 (त्रयोदशी, सूर्योदय से सूर्यास्त: Tithika की परिपाटी)

द्वादशी गुरु 30 सितंबर को 03:15 पर, रात में, अरुणोदय (04:19) से पहले समाप्त होती है: रात में समाप्त द्वादशी को Tithika नहीं गिनता, उसकी परिपाटी। द्वादशी न हो तो निर्णयसिंधु पारण त्रयोदशी में कराता है: सूर्योदय (05:55) से सूर्यास्त (18:10) तक, क्योंकि पारण दिन का कर्म है: Tithika की परिपाटी।

नियम

आश्विन कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · भाद्रपद कृष्ण एकादशी (अमान्त)

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।