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Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में इंदिरा एकादशी 1944 पारण समय 06:42⁠–⁠18:07, बुध 13 सितंबर

व्रत · समय UTC−3 में

Ipameri में इंदिरा एकादशी 1944 कब है?

मंगलवार 12 सितंबर

आश्विन कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · भाद्रपद कृष्ण एकादशी (अमान्त)

स्मार्त · वैष्णव

Ipameri में मंगल 12 सितंबर का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

बुधवार 13 सितंबर

पारण समय
06:42–18:07
11 घं 25 मि · Tithika की परिपाटी

इंदिरा एकादशी का समय: व्रत, पारण

  • मंगलवार 12 सितंबर
  • 06:10व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • बुधवार 13 सितंबर
  • 06:42–18:07पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंइंदिरा एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Ipameri में इंदिरा एकादशी मंगल 12 सितंबर को क्यों है?

इंदिरा एकादशी मंगल 12 सितंबर को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 22:31 सोम से 00:11 बुध तक।

एकादशी 00:11 पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल मंगल 12 सितंबर को सूर्योदय पर है, 06:10: मंगल 12 सितंबर। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 22:31 सोम पर, उससे (04:34–06:10) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · बुध 13 सितंबर, 06:42–18:07 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी बुध 13 सितंबर 00:11 से गुरु 14 सितंबर 02:16 तक है; हरिवासर 06:42 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (18:07) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:33 तक, करते हैं।

नियम

आश्विन कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · भाद्रपद कृष्ण एकादशी (अमान्त)

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।