tithika
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Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में इंदिरा एकादशी 1938 सोम 19 सितंबर या मंगल 20 सितंबर

व्रत · समय UTC−3 में

Ipameri में इंदिरा एकादशी 1938 कब है?

स्मार्त

सोमवार 19 सितंबर

वैष्णव

मंगलवार 20 सितंबर

आश्विन कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · भाद्रपद कृष्ण एकादशी (अमान्त)

Ipameri में सोम 19 सितंबर का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

स्मार्त · मंगलवार 20 सितंबर

पारण समय
09:03–18:08
9 घं 5 मि · Tithika की परिपाटी

वैष्णव · बुधवार 21 सितंबर

पारण समय
06:03–18:08
12 घं 5 मि · Tithika की परिपाटी

इंदिरा एकादशी का समय: व्रत, पारण

स्मार्त

  • सोमवार 19 सितंबर
  • 06:05व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • मंगलवार 20 सितंबर
  • 09:03–18:08पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी

वैष्णव

  • मंगलवार 20 सितंबर
  • 06:04व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • बुधवार 21 सितंबर
  • 06:03–18:08पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंइंदिरा एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Ipameri में इंदिरा एकादशी सोम 19 सितंबर या मंगल 20 सितंबर को क्यों है?

स्मार्त · स्मार्त परंपरा में इंदिरा एकादशी सोम 19 सितंबर को है: एकादशी किसी सूर्योदय पर नहीं है, और क्षय एकादशी उसी दिन रखी जाती है जिस दिन वह चलती है। वैष्णव मंगल 20 सितंबर को व्रत रखते हैं।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर दशमी; एकादशी 06:25 से। एकादशी: 06:25 से 03:44 मंगल तक।

एकादशी 03:44 पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी। एकादशी: 06:25 सोम से 03:44 तक।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं। यह सोम 19 सितंबर को 06:25 पर, उस सूर्योदय (06:05) के बाद, लगती है और मंगल 20 सितंबर को 03:44 पर, अगले सूर्योदय (06:04 मंगल) से पहले, समाप्त होती है: यह किसी सूर्योदय पर नहीं है। क्षय एकादशी उसी दिन रखी जाती है जिस दिन वह चलती है: सोम 19 सितंबर।

वैष्णव

वैष्णव अरुणोदय देखते हैं, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट। सोम 19 सितंबर को अरुणोदय (04:29–06:05) में दशमी है। मंगल 20 सितंबर को उसमें दशमी नहीं (एकादशी 03:44 तक, फिर द्वादशी): मंगल 20 सितंबर।

व्रत का पारण

स्मार्त · मंगल 20 सितंबर, 09:03–18:08 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी मंगल 20 सितंबर 03:44 से बुध 21 सितंबर 00:59 तक है; हरिवासर 09:03 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (18:08) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:29 तक, करते हैं; यहाँ यह समय हरिवासर से पहले समाप्त हो जाता है।

वैष्णव · बुध 21 सितंबर, 06:03–18:08 (त्रयोदशी, सूर्योदय से सूर्यास्त: Tithika की परिपाटी)

द्वादशी बुध 21 सितंबर को 00:59 पर, रात में, अरुणोदय (04:27) से पहले समाप्त होती है: रात में समाप्त द्वादशी को Tithika नहीं गिनता, उसकी परिपाटी। द्वादशी न हो तो निर्णयसिंधु पारण त्रयोदशी में कराता है: सूर्योदय (06:03) से सूर्यास्त (18:08) तक, क्योंकि पारण दिन का कर्म है: Tithika की परिपाटी।

नियम

आश्विन कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · भाद्रपद कृष्ण एकादशी (अमान्त)

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।