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Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में इंदिरा एकादशी 1934 पारण समय 05:52⁠–⁠08:33, शुक्र 5 अक्टूबर

व्रत · समय UTC−3 में

Ipameri में इंदिरा एकादशी 1934 कब है?

गुरुवार 4 अक्टूबर

आश्विन कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · भाद्रपद कृष्ण एकादशी (अमान्त)

स्मार्त · वैष्णव

Ipameri में गुरु 4 अक्टूबर का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

शुक्रवार 5 अक्टूबर

पारण समय
05:52–08:33
2 घं 41 मि

इंदिरा एकादशी का समय: व्रत, पारण

  • गुरुवार 4 अक्टूबर
  • 05:52व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • शुक्रवार 5 अक्टूबर
  • 05:52–08:33पारण समयव्रत खोलने का समय
Tithika में खोलेंइंदिरा एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Ipameri में इंदिरा एकादशी गुरु 4 अक्टूबर को क्यों है?

इंदिरा एकादशी गुरु 4 अक्टूबर को है: एकादशी और द्वादशी दोनों बढ़ी हैं, इसलिए स्मार्त बाद का दिन लेते हैं, और उसका अरुणोदय दशमी से मुक्त है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 03:49 से 06:21 गुरु तक।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 03:49 बुध से 06:21 तक।

द्वादशी: 06:21 गुरु से 08:33 तक, अपने दिन से लंबी: यह भी बढ़ी है।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं। यह दोनों सूर्योदयों पर है, बुध 3 अक्टूबर को 05:53 और गुरु 4 अक्टूबर को 05:52। एकादशी (बुध 3 अक्टूबर 03:49 से गुरु 4 अक्टूबर 06:21 तक) और द्वादशी (गुरु 4 अक्टूबर 06:21 से शुक्र 5 अक्टूबर 08:33 तक) दोनों अपने दिन से लंबी हैं; दोनों बढ़ें तो स्मार्त बाद का दिन लेते हैं: गुरु 4 अक्टूबर। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दो सूर्योदयों पर हो तो वे भी दूसरे दिन व्रत रखते हैं।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · शुक्र 5 अक्टूबर, 05:52–08:33

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी गुरु 4 अक्टूबर 06:21 से शुक्र 5 अक्टूबर 08:33 तक है; हरिवासर 12:54 गुरु पर पूरा होता है। इसलिए पारण शुक्र 5 अक्टूबर को सूर्योदय (05:52) से होता है।

नियम

आश्विन कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · भाद्रपद कृष्ण एकादशी (अमान्त)

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।