Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में इंदिरा एकादशी 1920 गुरु 7 अक्टूबर या शुक्र 8 अक्टूबर
व्रत · समय UTC−3 में
Ipameri में इंदिरा एकादशी 1920 कब है?
स्मार्त
गुरुवार 7 अक्टूबर
वैष्णव
शुक्रवार 8 अक्टूबर
आश्विन कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · भाद्रपद कृष्ण एकादशी (अमान्त)
Ipameri में गुरु 7 अक्टूबर का पूरा पंचांगपारण का समय: व्रत कब खोलें?
स्मार्त · शुक्रवार 8 अक्टूबर
वैष्णव · शनिवार 9 अक्टूबर
इंदिरा एकादशी का समय: व्रत, पारण
स्मार्त
- गुरुवार 7 अक्टूबर
-
05:50व्रत आरंभसूर्योदय पर
- शुक्रवार 8 अक्टूबर
-
08:10–18:11पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
वैष्णव
- शुक्रवार 8 अक्टूबर
-
05:49व्रत आरंभसूर्योदय पर
- शनिवार 9 अक्टूबर
-
05:48–18:11पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Ipameri में इंदिरा एकादशी गुरु 7 अक्टूबर या शुक्र 8 अक्टूबर को क्यों है?
स्मार्त · स्मार्त परंपरा में इंदिरा एकादशी गुरु 7 अक्टूबर को है: उस दिन सूर्योदय पर एकादशी है। वैष्णव शुक्र 8 अक्टूबर को व्रत रखते हैं।
दशमी 04:32 तक, अरुणोदय के भीतर; सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 04:32 से 02:35 शुक्र तक।
एकादशी 02:35 पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी। एकादशी: 04:32 गुरु से 02:35 तक।
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।
स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल गुरु 7 अक्टूबर को सूर्योदय पर है, 05:50: गुरु 7 अक्टूबर।
वैष्णव अरुणोदय देखते हैं, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट। गुरु 7 अक्टूबर को दशमी 04:32 तक है, अरुणोदय (04:14–05:50) के भीतर, इसलिए वह एकादशी विद्ध है। एकादशी 02:35 पर समाप्त होती है, इसलिए वैष्णव शुक्र 8 अक्टूबर को व्रत रखते हैं: शुक्र 8 अक्टूबर।
व्रत का पारण
स्मार्त · शुक्र 8 अक्टूबर, 08:10–18:11 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)
पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी शुक्र 8 अक्टूबर 02:35 से शनि 9 अक्टूबर 00:52 तक है; हरिवासर 08:10 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (18:11) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:17 तक, करते हैं।
वैष्णव · शनि 9 अक्टूबर, 05:48–18:11 (त्रयोदशी, सूर्योदय से सूर्यास्त: Tithika की परिपाटी)
द्वादशी शनि 9 अक्टूबर को 00:52 पर, रात में, अरुणोदय (04:12) से पहले समाप्त होती है: रात में समाप्त द्वादशी को Tithika नहीं गिनता, उसकी परिपाटी। द्वादशी न हो तो निर्णयसिंधु पारण त्रयोदशी में कराता है: सूर्योदय (05:48) से सूर्यास्त (18:11) तक, क्योंकि पारण दिन का कर्म है: Tithika की परिपाटी।
नियम
आश्विन कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · भाद्रपद कृष्ण एकादशी (अमान्त)
एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।
- स्मार्त
- सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
- वैष्णव
- पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
- व्रत का पारण
- द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।