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Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में इंदिरा एकादशी 1913 पारण समय 05:58⁠–⁠12:39, शनि 27 सितंबर

व्रत · समय UTC−3 में

Ipameri में इंदिरा एकादशी 1913 कब है?

शुक्रवार 26 सितंबर

आश्विन कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · भाद्रपद कृष्ण एकादशी (अमान्त)

स्मार्त · वैष्णव

Ipameri में शुक्र 26 सितंबर का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

शनिवार 27 सितंबर

पारण समय
05:58–12:39
6 घं 41 मि

इंदिरा एकादशी का समय: व्रत, पारण

  • शुक्रवार 26 सितंबर
  • 05:59व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • शनिवार 27 सितंबर
  • 05:58–12:39पारण समयव्रत खोलने का समय
Tithika में खोलेंइंदिरा एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Ipameri में इंदिरा एकादशी शुक्र 26 सितंबर को क्यों है?

इंदिरा एकादशी शुक्र 26 सितंबर को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर दशमी; एकादशी 18:01 से।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 18:01 गुरु से 15:32 तक।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल शुक्र 26 सितंबर को सूर्योदय पर है, 05:53: शुक्र 26 सितंबर। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 18:01 गुरु पर, उससे (04:17–05:53) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · शनि 27 सितंबर, 05:58–12:39

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी शुक्र 26 सितंबर 15:32 से शनि 27 सितंबर 12:33 तक है; हरिवासर 20:47 शुक्र पर पूरा होता है। इसलिए पारण शनि 27 सितंबर को सूर्योदय (05:52) से होता है। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:18 तक, करते हैं।

नियम

आश्विन कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · भाद्रपद कृष्ण एकादशी (अमान्त)

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।