tithika
English

Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में इंदिरा एकादशी 1902 पारण समय 05:58⁠–⁠16:46, रवि 28 सितंबर

व्रत · समय UTC−3 में

Ipameri में इंदिरा एकादशी 1902 कब है?

शनिवार 27 सितंबर

आश्विन कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · भाद्रपद कृष्ण एकादशी (अमान्त)

स्मार्त · वैष्णव

Ipameri में शनि 27 सितंबर का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

रविवार 28 सितंबर

पारण समय
05:58–16:46
10 घं 48 मि

इंदिरा एकादशी का समय: व्रत, पारण

  • शनिवार 27 सितंबर
  • 05:58व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • रविवार 28 सितंबर
  • 05:58–16:46पारण समयव्रत खोलने का समय
Tithika में खोलेंइंदिरा एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Ipameri में इंदिरा एकादशी शनि 27 सितंबर को क्यों है?

इंदिरा एकादशी शनि 27 सितंबर को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 20:08 शुक्र से 18:16 तक।

एकादशी 18:16 शनि पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल शनि 27 सितंबर को सूर्योदय पर है, 05:52: शनि 27 सितंबर। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 20:08 शुक्र पर, उससे (04:16–05:52) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · रवि 28 सितंबर, 05:58–16:46

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी शनि 27 सितंबर 18:16 से रवि 28 सितंबर 16:39 तक है; हरिवासर 23:52 शनि पर पूरा होता है। इसलिए पारण रवि 28 सितंबर को सूर्योदय (05:51) से होता है। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:17 तक, करते हैं।

नियम

आश्विन कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · भाद्रपद कृष्ण एकादशी (अमान्त)

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।