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Pāthardi, महाराष्ट्र में दीवाली 2024 गुरु 31 अक्टूबर या शुक्र 1 नवंबर

महाराष्ट्र, भारत

त्योहार · समय IST में

Pāthardi में दीवाली 2024 कब है?

स्मार्त · वैष्णव

गुरुवार 31 अक्टूबर

धर्मसिंधु · स्मार्त का एक मत

शुक्रवार 1 नवंबर

कार्तिक अमावस्या (पूर्णिमान्त) · आश्विन अमावस्या (अमान्त)

Pāthardi में गुरु 31 अक्टूबर का पूरा पंचांग

दीवाली लक्ष्मी पूजा मुहूर्त कब से कब तक?

स्मार्त · वैष्णव · गुरुवार 31 अक्टूबर

लक्ष्मी पूजा मुहूर्त
18:47–20:26
1 घं 39 मि · Tithika की परिपाटी

लक्ष्मी पूजा मुहूर्त: प्रदोष काल, 17:55⁠–⁠20:26। इसमें स्थिर लग्न वृषभ पूर्व में 18:47 से 20:26 तक उदित रहता है।

धर्मसिंधु · शुक्रवार 1 नवंबर

लक्ष्मी पूजा मुहूर्त
18:44–20:26
1 घं 42 मि · Tithika की परिपाटी

लक्ष्मी पूजा मुहूर्त: प्रदोष काल, 17:55⁠–⁠20:26। इसमें स्थिर लग्न वृषभ पूर्व में 18:44 से 20:26 तक उदित रहता है।

Tithika में खोलेंदीवाली की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Pāthardi में दीवाली गुरु 31 अक्टूबर या शुक्र 1 नवंबर को क्यों है?

स्मार्त · वैष्णव · निर्णयसिंधु के अनुसार दीवाली · लक्ष्मी पूजा गुरु 31 अक्टूबर को है: उस शाम पूरे प्रदोष काल में अमावस्या है।

लक्ष्मी पूजा मुहूर्त: प्रदोष काल, 17:55⁠–⁠20:26। इसमें स्थिर लग्न वृषभ पूर्व में 18:47 से 20:26 तक उदित रहता है।

पूरे प्रदोष काल में अमावस्या, 17:55–20:26। अमावस्या: 15:53 से 18:17 शुक्र तक।

प्रदोष काल में अमावस्या केवल 18:17 तक; फिर प्रतिपदा। अमावस्या: 15:53 गुरु से 18:17 तक।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (IST)। पट्टी: तिथि। खाना: प्रदोष काल। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात।

स्मार्त · वैष्णव

लक्ष्मी पूजा प्रदोष काल में होती है, सूर्यास्त के बाद के 3 मुहूर्त। अमावस्या गुरु 31 अक्टूबर को 15:53 पर लगी, उस शाम के प्रदोष काल से पहले, और शुक्र 1 नवंबर को 18:17 पर उतरी, अगले प्रदोष काल के बीच में। निर्णयसिंधु वह शाम लेता है जिसे अमावस्या पूरा भरती है: गुरु 31 अक्टूबर।

धर्मसिंधु

अमावस्या दोनों शाम के प्रदोष काल को छूती है। ऐसे में धर्मसिंधु बाद का दिन लेता है: शुक्र 1 नवंबर, जहाँ 18:17 तक प्रदोष काल में अमावस्या है।

नियम

कार्तिक अमावस्या (पूर्णिमान्त) · आश्विन अमावस्या (अमान्त)

लक्ष्मी पूजा प्रदोष काल में होती है, सूर्यास्त के बाद के 3 मुहूर्त।

स्मार्त
वह शाम जिसके प्रदोष काल में अमावस्या हो; दोनों दिन छुए तो वह जिसमें अधिक हो; किसी दिन न छुए तो पहला दिन (निर्णयसिंधु)।
धर्मसिंधु
वह शाम जिसके प्रदोष काल में अमावस्या हो; दोनों दिन छुए तो बाद वाला दिन; किसी दिन न छुए तो पहला दिन (धर्मसिंधु)।
वैष्णव
स्मार्त वाला दिन।