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Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में दीवाली 2014 बुध 22 अक्टूबर या गुरु 23 अक्टूबर

त्योहार · समय UTC−2 में

Ipameri में दीवाली 2014 कब है?

स्मार्त · वैष्णव

बुधवार 22 अक्टूबर

धर्मसिंधु · स्मार्त का एक मत

गुरुवार 23 अक्टूबर

कार्तिक अमावस्या (पूर्णिमान्त) · आश्विन अमावस्या (अमान्त)

Ipameri में बुध 22 अक्टूबर का पूरा पंचांग

दीवाली लक्ष्मी पूजा मुहूर्त कब से कब तक?

स्मार्त · वैष्णव · बुधवार 22 अक्टूबर

लक्ष्मी पूजा मुहूर्त
20:59–21:32
33 मि · Tithika की परिपाटी

लक्ष्मी पूजा मुहूर्त: प्रदोष काल, 19:15⁠–⁠21:32। इसमें स्थिर लग्न वृषभ पूर्व में 20:59 से 21:32 तक उदित रहता है।

धर्मसिंधु · गुरुवार 23 अक्टूबर

लक्ष्मी पूजा मुहूर्त
20:55–21:32
37 मि · Tithika की परिपाटी

लक्ष्मी पूजा मुहूर्त: प्रदोष काल, 19:15⁠–⁠21:32। इसमें स्थिर लग्न वृषभ पूर्व में 20:55 से 21:32 तक उदित रहता है।

Tithika में खोलेंदीवाली की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Ipameri में दीवाली बुध 22 अक्टूबर या गुरु 23 अक्टूबर को क्यों है?

स्मार्त · वैष्णव · निर्णयसिंधु के अनुसार दीवाली · लक्ष्मी पूजा बुध 22 अक्टूबर को है: उस शाम पूरे प्रदोष काल में अमावस्या है।

लक्ष्मी पूजा मुहूर्त: प्रदोष काल, 19:15⁠–⁠21:32। इसमें स्थिर लग्न वृषभ पूर्व में 20:59 से 21:32 तक उदित रहता है।

पूरे प्रदोष काल में अमावस्या, 19:15–21:32। अमावस्या: 19:05 से 19:56 गुरु तक।

प्रदोष काल में अमावस्या केवल 19:56 तक; फिर प्रतिपदा। अमावस्या: 19:05 बुध से 19:56 तक।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−2)। पट्टी: तिथि। खाना: प्रदोष काल। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात।

स्मार्त · वैष्णव

लक्ष्मी पूजा प्रदोष काल में होती है, सूर्यास्त के बाद के 3 मुहूर्त। अमावस्या बुध 22 अक्टूबर को 19:05 पर लगी, उस शाम के प्रदोष काल से पहले, और गुरु 23 अक्टूबर को 19:56 पर उतरी, अगले प्रदोष काल के बीच में। निर्णयसिंधु वह शाम लेता है जिसे अमावस्या पूरा भरती है: बुध 22 अक्टूबर।

धर्मसिंधु

अमावस्या दोनों शाम के प्रदोष काल को छूती है। ऐसे में धर्मसिंधु बाद का दिन लेता है: गुरु 23 अक्टूबर, जहाँ 19:56 तक प्रदोष काल में अमावस्या है।

नियम

कार्तिक अमावस्या (पूर्णिमान्त) · आश्विन अमावस्या (अमान्त)

लक्ष्मी पूजा प्रदोष काल में होती है, सूर्यास्त के बाद के 3 मुहूर्त।

स्मार्त
वह शाम जिसके प्रदोष काल में अमावस्या हो; दोनों दिन छुए तो वह जिसमें अधिक हो; किसी दिन न छुए तो पहला दिन (निर्णयसिंधु)।
धर्मसिंधु
वह शाम जिसके प्रदोष काल में अमावस्या हो; दोनों दिन छुए तो बाद वाला दिन; किसी दिन न छुए तो पहला दिन (धर्मसिंधु)।
वैष्णव
स्मार्त वाला दिन।