tithika
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Sevan, गेघार्कुनिक प्रांत, आर्मेनिया में दीवाली 1990 बुध 17 अक्टूबर या गुरु 18 अक्टूबर

त्योहार · समय UTC+4 में

Sevan में दीवाली 1990 कब है?

स्मार्त · वैष्णव

बुधवार 17 अक्टूबर

धर्मसिंधु · स्मार्त का एक मत

गुरुवार 18 अक्टूबर

कार्तिक अमावस्या (पूर्णिमान्त) · आश्विन अमावस्या (अमान्त)

Sevan में बुध 17 अक्टूबर का पूरा पंचांग

दीवाली लक्ष्मी पूजा मुहूर्त कब से कब तक?

स्मार्त · वैष्णव · बुधवार 17 अक्टूबर

लक्ष्मी पूजा मुहूर्त
19:34–20:52
1 घं 18 मि · Tithika की परिपाटी

लक्ष्मी पूजा मुहूर्त: प्रदोष काल, 18:17⁠–⁠20:52। इसमें स्थिर लग्न वृषभ पूर्व में 19:34 से 20:52 तक उदित रहता है।

धर्मसिंधु · गुरुवार 18 अक्टूबर

लक्ष्मी पूजा मुहूर्त
19:30–20:51
1 घं 21 मि · Tithika की परिपाटी

लक्ष्मी पूजा मुहूर्त: प्रदोष काल, 18:16⁠–⁠20:51। इसमें स्थिर लग्न वृषभ पूर्व में 19:30 से 20:51 तक उदित रहता है।

Tithika में खोलेंदीवाली की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Sevan में दीवाली बुध 17 अक्टूबर या गुरु 18 अक्टूबर को क्यों है?

स्मार्त · वैष्णव · निर्णयसिंधु के अनुसार दीवाली · लक्ष्मी पूजा बुध 17 अक्टूबर को है: उस शाम अमावस्या प्रदोष काल का गुरु 18 अक्टूबर से अधिक भाग घेरती है।

लक्ष्मी पूजा मुहूर्त: प्रदोष काल, 18:17⁠–⁠20:52। इसमें स्थिर लग्न वृषभ पूर्व में 19:34 से 20:52 तक उदित रहता है।

प्रदोष काल में चतुर्दशी 18:18 तक; फिर अमावस्या। अमावस्या: 18:18 से 19:36 गुरु तक।

प्रदोष काल में अमावस्या केवल 19:36 तक; फिर प्रतिपदा। अमावस्या: 18:18 बुध से 19:36 तक।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC+4)। पट्टी: तिथि। खाना: प्रदोष काल। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात।

स्मार्त · वैष्णव

लक्ष्मी पूजा प्रदोष काल में होती है, सूर्यास्त के बाद के 3 मुहूर्त। अमावस्या बुध 17 अक्टूबर को 18:18 से गुरु 18 अक्टूबर को 19:36 तक है, और दोनों शाम प्रदोष काल को छूती है। निर्णयसिंधु वह शाम लेता है जिसका प्रदोष काल उसमें अधिक है: बुध 17 अक्टूबर।

धर्मसिंधु

अमावस्या दोनों शाम के प्रदोष काल को छूती है। ऐसे में धर्मसिंधु बाद का दिन लेता है: गुरु 18 अक्टूबर, जहाँ 19:36 तक प्रदोष काल में अमावस्या है।

नियम

कार्तिक अमावस्या (पूर्णिमान्त) · आश्विन अमावस्या (अमान्त)

लक्ष्मी पूजा प्रदोष काल में होती है, सूर्यास्त के बाद के 3 मुहूर्त।

स्मार्त
वह शाम जिसके प्रदोष काल में अमावस्या हो; दोनों दिन छुए तो वह जिसमें अधिक हो; किसी दिन न छुए तो पहला दिन (निर्णयसिंधु)।
धर्मसिंधु
वह शाम जिसके प्रदोष काल में अमावस्या हो; दोनों दिन छुए तो बाद वाला दिन; किसी दिन न छुए तो पहला दिन (धर्मसिंधु)।
वैष्णव
स्मार्त वाला दिन।