दीवाली 2026 रवि 8 नवंबर
नई दिल्ली में लक्ष्मी पूजा मुहूर्त: 17:54–19:50 IST
त्योहार · 30 शहर, हर शहर अपने सूर्योदय और सूर्यास्त पर, अपने समय में
दीवाली 2026 कब है?
रविवार 8 नवंबर
कार्तिक अमावस्या (पूर्णिमान्त) · आश्विन अमावस्या (अमान्त)
दीवाली लक्ष्मी पूजा मुहूर्त कब से कब तक?
लक्ष्मी पूजा मुहूर्त: प्रदोष काल, 17:31–20:08। इसमें स्थिर लग्न वृषभ पूर्व में 17:54 से 19:50 तक उदित रहता है।
30 शहरों में दीवाली लक्ष्मी पूजा मुहूर्त
हर शहर का समय उसके अपने ज़ोन में।
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कोई और स्थान?
उस स्थान का दीवाली · लक्ष्मी पूजा 2026 खुलेगा
राज्य और देश के अनुसार दीवाली 2026
हर एक पर वहाँ की दीवाली 2026: तारीख़ और हर शहर का लक्ष्मी पूजा मुहूर्त।
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देश
दीवाली क्यों मनाई जाती है? कथा
कार्तिक अमावस्या, पाँच दिनों का केंद्र, जब घर दीपों की पंक्तियों से जगमगाते हैं और शाम को लक्ष्मी पूजा होती है, ताकि सौभाग्य आए और दरिद्रता (अलक्ष्मी) दूर हो।
दीपावली की एक से अधिक कथाएँ हैं। अंडरहिल भविष्योत्तर पुराण की कथा देती हैं: राजा बलि ने भक्ति से इतनी शक्ति पा ली कि वे देवताओं और मनुष्यों को सताने लगे। तब विष्णु वामन बनकर भिक्षुक के रूप में उनके पास गए और तीन पग धरती माँगी।
बलि के हाँ कहते ही वामन विराट हो गए: पहले पग में धरती, दूसरे में आकाश नाप लिया और तीसरे से बलि को पाताल में दबा दिया। फिर दया करके विष्णु ने बलि को पाताल का राज्य दिया, और हर साल तीन दिन धरती पर वहाँ राज करने का अधिकार जहाँ दीप न जले हों। इसीलिए इन रातों में हर घर में दीये जलाए जाते हैं।
दूसरी मान्यता है कि दीपावली लंका से लौटने पर श्रीराम के राज्याभिषेक का उत्सव है, और उत्तर भारत के बहुत-से घरों में यही कथा कही जाती है। काणे बताते हैं कि इस रात व्यापारी बही-खातों की पूजा करते हैं और दीये केवल घर में ही नहीं, चौराहों, नदी के तट और गोशालाओं में भी रखे जाते हैं।
स्रोत: एम. एम. अंडरहिल, द हिंदू रिलीजियस ईयर (1921), पृ. 60, 63; पी. वी. काणे, हिस्ट्री ऑफ़ धर्मशास्त्र, खंड 5, भाग 1 (भंडारकर संस्थान, 1958), पृ. 199–200
दीवाली की पूजा विधि और सामग्री
कार्तिक अमावस्या को सुबह तेल-स्नान और दिन भर हल्के भोजन के बाद शाम को गणेश के साथ लक्ष्मी की पूजा होती है। उन्हें जल, रोली-अक्षत, फूल, मिठाई, फल और दीप अर्पित किए जाते हैं, और व्यापारी अपने बही-खाते उनके सामने रखते हैं। फिर पूरे घर में, द्वार पर, चौराहे और गोशाला में दीपों की पंक्तियाँ जलाई जाती हैं। काणे के संकलित ग्रंथ कहते हैं कि ऐसे जगमगाते घर से अलक्ष्मी दूर होती है और लक्ष्मी आती हैं।
नई दिल्ली · IST
स्रोत: पी. वी. काणे, हिस्ट्री ऑफ़ धर्मशास्त्र, खंड 5, भाग 1 (भंडारकर संस्थान, 1958), पृ. 199–200; एम. एम. अंडरहिल, द हिंदू रिलीजियस ईयर (1921), पृ. 61
दीवाली रवि 8 नवंबर को क्यों है?
नई दिल्ली में
दीवाली · लक्ष्मी पूजा रवि 8 नवंबर को है: उस शाम पूरे प्रदोष काल में अमावस्या है, और किसी शाम नहीं।
लक्ष्मी पूजा मुहूर्त: प्रदोष काल, 17:31–20:08। इसमें स्थिर लग्न वृषभ पूर्व में 17:54 से 19:50 तक उदित रहता है।
पूरे प्रदोष काल में अमावस्या, 17:31–20:08। अमावस्या: 11:28 से 12:32 सोम तक।
अमावस्या 12:32 पर समाप्त; प्रदोष काल में प्रतिपदा।
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (IST)। पट्टी: तिथि। खाना: प्रदोष काल। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात।
लक्ष्मी पूजा प्रदोष काल में होती है, सूर्यास्त के बाद के 3 मुहूर्त। अमावस्या रवि 8 नवंबर को 11:28 से सोम 9 नवंबर को 12:32 तक है, इसलिए केवल रविवार का प्रदोष काल (17:31–20:08) उसके भीतर है। हर मत यही दिन लेता है।
नियम
कार्तिक अमावस्या (पूर्णिमान्त) · आश्विन अमावस्या (अमान्त)
लक्ष्मी पूजा प्रदोष काल में होती है, सूर्यास्त के बाद के 3 मुहूर्त।
- स्मार्त
- वह शाम जिसके प्रदोष काल में अमावस्या हो; दोनों दिन छुए तो वह जिसमें अधिक हो; किसी दिन न छुए तो पहला दिन (निर्णयसिंधु)।
- धर्मसिंधु
- वह शाम जिसके प्रदोष काल में अमावस्या हो; दोनों दिन छुए तो बाद वाला दिन; किसी दिन न छुए तो पहला दिन (धर्मसिंधु)।
- वैष्णव
- स्मार्त वाला दिन।
हर शहर की तारीख़ और समय उसके अपने सूर्योदय और सूर्यास्त से निकाले गए हैं; हर शहर का पेज कारण चित्र में दिखाता है।