धनतेरस 2026 शुक्र 6 नवंबर
नई दिल्ली में धनतेरस पूजा मुहूर्त: 18:02–19:58 IST
त्योहार · 30 शहर, हर शहर अपने सूर्योदय और सूर्यास्त पर, अपने समय में
धनतेरस 2026 कब है?
शुक्रवार 6 नवंबर
कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी (पूर्णिमान्त) · आश्विन कृष्ण त्रयोदशी (अमान्त)
धनतेरस पूजा मुहूर्त कब से कब तक?
धनतेरस पूजा मुहूर्त: प्रदोष काल, 17:32–20:09। इसमें स्थिर लग्न वृषभ पूर्व में 18:02 से 19:58 तक उदित रहता है।
30 शहरों में धनतेरस पूजा मुहूर्त
हर शहर का समय उसके अपने ज़ोन में।
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कोई और स्थान?
उस स्थान का धनतेरस 2026 खुलेगा
राज्य और देश के अनुसार धनतेरस 2026
हर एक पर वहाँ की धनतेरस 2026: तारीख़ और हर शहर का धनतेरस पूजा मुहूर्त।
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देश
धनतेरस क्यों मनाई जाती है? कथा
कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी, धनतेरस, से दीपावली के पाँच दिन शुरू होते हैं: घर की सफ़ाई होती है, धातु के बर्तन ख़रीदे या चमकाए जाते हैं, शाम को लक्ष्मी पूजा होती है और यम के लिए दीया जलाया जाता है।
अंडरहिल एक कथा लिखती हैं: राजा हैम के पुत्र के जन्म पर भविष्यवाणी हुई कि विवाह के चौथे दिन साँप के काटने से उसकी मृत्यु होगी। भाग्य को टालने के लिए उसे यमुना के बीच एक टापू पर साँपों से सुरक्षित महल में रखा गया, पर उसी दिन राजा की छींक से एक साँप निकला और उसके काटने से राजकुमार की मृत्यु हो गई।
बालक को लेने आए यमदूत भी दुखी हुए और उन्होंने यमराज से पूछा कि क्या ऐसी मृत्यु रोकी जा सकती है। यम ने कहा कि इस त्रयोदशी से अमावस्या के बाद की द्वितीया तक हर शाम दीये जलाने से अकाल मृत्यु नहीं होती।
इसलिए धनतेरस की शाम बहुत-से घरों में यम के लिए दरवाज़े के बाहर दीया रखा जाता है। व्यापारी भी साल का हिसाब बंद करके बही-खातों और सिक्कों की धन देने वाली लक्ष्मी के साथ पूजा करते हैं।
स्रोत: एम. एम. अंडरहिल, द हिंदू रिलीजियस ईयर (1921), पृ. 59–61
धनतेरस की पूजा विधि और सामग्री
कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी को घर और द्वार की सफ़ाई होती है, और नए धातु के बर्तन ख़रीदे जाते हैं या पुराने चमकाए जाते हैं, क्योंकि इस दिन का नाम धन पर है। शाम को सिक्कों या नए बर्तन के साथ लक्ष्मी की पूजा होती है, और उन्हें रोली-अक्षत, फूल, मिठाई और घी का दीप अर्पित किया जाता है; व्यापारी उनके साथ अपने बही-खातों की पूजा करते हैं। फिर यम के लिए मिट्टी का एक दीया द्वार के बाहर रखा जाता है, क्योंकि अंडरहिल की दर्ज की हुई कथा में यम कहते हैं कि इस शाम से अमावस्या के बाद की द्वितीया तक जलाए दीये घर से अकाल मृत्यु को दूर रखते हैं।
नई दिल्ली · IST
स्रोत: पी. वी. काणे, हिस्ट्री ऑफ़ धर्मशास्त्र, खंड 5, भाग 1 (भंडारकर संस्थान, 1958), पृ. 195–196; एम. एम. अंडरहिल, द हिंदू रिलीजियस ईयर (1921), पृ. 59
धनतेरस शुक्र 6 नवंबर को क्यों है?
नई दिल्ली में
धनतेरस शुक्र 6 नवंबर को है: उस शाम पूरे प्रदोष काल में त्रयोदशी है, और किसी शाम नहीं।
धनतेरस पूजा मुहूर्त: प्रदोष काल, 17:32–20:09। इसमें स्थिर लग्न वृषभ पूर्व में 18:02 से 19:58 तक उदित रहता है।
पूरे प्रदोष काल में त्रयोदशी, 17:32–20:09। त्रयोदशी: 10:31 से 10:48 शनि तक।
त्रयोदशी 10:48 पर समाप्त; प्रदोष काल में चतुर्दशी।
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (IST)। पट्टी: तिथि। खाना: प्रदोष काल। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात।
धनतेरस की पूजा प्रदोष काल में होती है, सूर्यास्त के बाद के 3 मुहूर्त। त्रयोदशी शुक्र 6 नवंबर को 10:31 से शनि 7 नवंबर को 10:48 तक है, इसलिए केवल शुक्रवार का प्रदोष काल (17:32–20:09) उसके भीतर है। धनतेरस का समय बताने वाला कोई ग्रंथ नहीं मिला; प्रदोष काल Tithika की परिपाटी है।
नियम
कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी (पूर्णिमान्त) · आश्विन कृष्ण त्रयोदशी (अमान्त)
धनतेरस की पूजा प्रदोष काल में होती है, सूर्यास्त के बाद के 3 मुहूर्त।
- स्मार्त
- वह शाम जिसके प्रदोष काल में त्रयोदशी हो: Tithika की परिपाटी, क्योंकि कोई ग्रंथ समय नहीं बताता।
- वैष्णव
- स्मार्त वाला दिन।
हर शहर की तारीख़ और समय उसके अपने सूर्योदय और सूर्यास्त से निकाले गए हैं; हर शहर का पेज कारण चित्र में दिखाता है।