Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में देवशयनी एकादशी 2084 गुरु 13 जुलाई या शुक्र 14 जुलाई
व्रत · समय UTC−3 में
Ipameri में देवशयनी एकादशी 2084 कब है?
स्मार्त
गुरुवार 13 जुलाई
वैष्णव
शुक्रवार 14 जुलाई
आषाढ़ शुक्ल एकादशी
Ipameri में गुरु 13 जुलाई का पूरा पंचांगपारण का समय: व्रत कब खोलें?
स्मार्त · शुक्रवार 14 जुलाई
वैष्णव · शनिवार 15 जुलाई
देवशयनी एकादशी का समय: व्रत, पारण
स्मार्त
- गुरुवार 13 जुलाई
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06:44व्रत आरंभसूर्योदय पर
- शुक्रवार 14 जुलाई
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09:12–17:54पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
वैष्णव
- शुक्रवार 14 जुलाई
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06:44व्रत आरंभसूर्योदय पर
- शनिवार 15 जुलाई
-
06:43–17:54पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Ipameri में देवशयनी एकादशी गुरु 13 जुलाई या शुक्र 14 जुलाई को क्यों है?
स्मार्त · स्मार्त परंपरा में देवशयनी एकादशी गुरु 13 जुलाई को है: उस दिन सूर्योदय पर एकादशी है। वैष्णव शुक्र 14 जुलाई को व्रत रखते हैं।
दशमी 06:32 तक, अरुणोदय के भीतर; सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 06:32 से 03:58 शुक्र तक।
एकादशी 03:58 पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी। एकादशी: 06:32 गुरु से 03:58 तक।
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।
स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल गुरु 13 जुलाई को सूर्योदय पर है, 06:44: गुरु 13 जुलाई।
वैष्णव अरुणोदय देखते हैं, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट। गुरु 13 जुलाई को दशमी 06:32 तक है, अरुणोदय (05:08–06:44) के भीतर, इसलिए वह एकादशी विद्ध है। एकादशी 03:58 पर समाप्त होती है, इसलिए वैष्णव शुक्र 14 जुलाई को व्रत रखते हैं: शुक्र 14 जुलाई।
व्रत का पारण
स्मार्त · शुक्र 14 जुलाई, 09:12–17:54 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)
पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी शुक्र 14 जुलाई 03:58 से शनि 15 जुलाई 00:55 तक है; हरिवासर 09:12 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (17:54) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:58 तक, करते हैं; यहाँ यह समय हरिवासर से पहले समाप्त हो जाता है।
वैष्णव · शनि 15 जुलाई, 06:43–17:54 (त्रयोदशी, सूर्योदय से सूर्यास्त: Tithika की परिपाटी)
द्वादशी शनि 15 जुलाई को 00:55 पर, रात में, अरुणोदय (05:07) से पहले समाप्त होती है: रात में समाप्त द्वादशी को Tithika नहीं गिनता, उसकी परिपाटी। द्वादशी न हो तो निर्णयसिंधु पारण त्रयोदशी में कराता है: सूर्योदय (06:43) से सूर्यास्त (17:54) तक, क्योंकि पारण दिन का कर्म है: Tithika की परिपाटी।
नियम
आषाढ़ शुक्ल एकादशी
एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।
- स्मार्त
- सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
- वैष्णव
- पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
- व्रत का पारण
- द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।