tithika
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Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में देवशयनी एकादशी 2064 बुध 23 जुलाई या गुरु 24 जुलाई

व्रत · समय UTC−3 में

Ipameri में देवशयनी एकादशी 2064 कब है?

स्मार्त

बुधवार 23 जुलाई

वैष्णव

गुरुवार 24 जुलाई

आषाढ़ शुक्ल एकादशी

Ipameri में बुध 23 जुलाई का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

स्मार्त · गुरुवार 24 जुलाई

पारण समय
12:05–17:57
5 घं 52 मि · Tithika की परिपाटी

वैष्णव · शुक्रवार 25 जुलाई

पारण समय
05:05–05:17
12 मि · Tithika की परिपाटी

देवशयनी एकादशी का समय: व्रत, पारण

स्मार्त

  • बुधवार 23 जुलाई
  • 06:42व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • गुरुवार 24 जुलाई
  • 12:05–17:57पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी

वैष्णव

  • गुरुवार 24 जुलाई
  • 06:41व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • शुक्रवार 25 जुलाई
  • 05:05–05:17पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंदेवशयनी एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Ipameri में देवशयनी एकादशी बुध 23 जुलाई या गुरु 24 जुलाई को क्यों है?

स्मार्त · स्मार्त परंपरा में देवशयनी एकादशी बुध 23 जुलाई को है: एकादशी किसी सूर्योदय पर नहीं है, और क्षय एकादशी उसी दिन रखी जाती है जिस दिन वह चलती है। वैष्णव गुरु 24 जुलाई को व्रत रखते हैं।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर दशमी; एकादशी 07:47 से। एकादशी: 07:47 से 06:21 गुरु तक।

अरुणोदय में एकादशी केवल 06:21 तक; फिर द्वादशी। एकादशी: 07:47 बुध से 06:21 तक।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं। यह बुध 23 जुलाई को 07:47 पर, उस सूर्योदय (06:42) के बाद, लगती है और गुरु 24 जुलाई को 06:21 पर, अगले सूर्योदय (06:41 गुरु) से पहले, समाप्त होती है: यह किसी सूर्योदय पर नहीं है। क्षय एकादशी उसी दिन रखी जाती है जिस दिन वह चलती है: बुध 23 जुलाई।

वैष्णव

वैष्णव अरुणोदय देखते हैं, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट। बुध 23 जुलाई को अरुणोदय (05:06–06:42) में दशमी है। गुरु 24 जुलाई को उसमें दशमी नहीं (एकादशी 06:21 तक, फिर द्वादशी): गुरु 24 जुलाई।

व्रत का पारण

स्मार्त · गुरु 24 जुलाई, 12:05–17:57 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी गुरु 24 जुलाई 06:21 से शुक्र 25 जुलाई 05:17 तक है; हरिवासर 12:05 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (17:57) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:56 तक, करते हैं; यहाँ यह समय हरिवासर से पहले समाप्त हो जाता है।

वैष्णव · शुक्र 25 जुलाई, 05:05–05:17 (अरुणोदय से, Tithika की परिपाटी)

द्वादशी शुक्र 25 जुलाई को 05:17 पर, अरुणोदय (05:05) लगने के बाद और सूर्योदय (06:41) से पहले, समाप्त होती है। द्वादशी छोटी हो तो निर्णयसिंधु, मत्स्य पुराण के अनुसार, पारण भोर में, द्वादशी समाप्त होने से पहले कराता है। Tithika इसे अरुणोदय से आरंभ करता है: Tithika की परिपाटी।

नियम

आषाढ़ शुक्ल एकादशी

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।