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Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में देवशयनी एकादशी 2061 पारण समय 06:44⁠–⁠11:29, बुध 29 जून

व्रत · समय UTC−3 में

Ipameri में देवशयनी एकादशी 2061 कब है?

मंगलवार 28 जून

आषाढ़ शुक्ल एकादशी

स्मार्त · वैष्णव

Ipameri में मंगल 28 जून का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

बुधवार 29 जून

पारण समय
06:44–11:29
4 घं 45 मि

देवशयनी एकादशी का समय: व्रत, पारण

  • मंगलवार 28 जून
  • 06:43व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • बुधवार 29 जून
  • 06:44–11:29पारण समयव्रत खोलने का समय
Tithika में खोलेंदेवशयनी एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Ipameri में देवशयनी एकादशी मंगल 28 जून को क्यों है?

देवशयनी एकादशी मंगल 28 जून को है: एकादशी और द्वादशी दोनों बढ़ी हैं, इसलिए स्मार्त बाद का दिन लेते हैं, और उसका अरुणोदय दशमी से मुक्त है।

दशमी 06:31 तक, अरुणोदय के भीतर; सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 06:31 से 08:59 मंगल तक।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 06:31 सोम से 08:59 तक।

द्वादशी: 08:59 मंगल से 11:29 तक, अपने दिन से लंबी: यह भी बढ़ी है।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं। यह दोनों सूर्योदयों पर है, सोम 27 जून को 06:43 और मंगल 28 जून को 06:43। एकादशी (सोम 27 जून 06:31 से मंगल 28 जून 08:59 तक) और द्वादशी (मंगल 28 जून 08:59 से बुध 29 जून 11:29 तक) दोनों अपने दिन से लंबी हैं; दोनों बढ़ें तो स्मार्त बाद का दिन लेते हैं: मंगल 28 जून। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: सोम 27 जून को दशमी 06:31 तक है, उसके भीतर (05:07–06:43); मंगल 28 जून को पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · बुध 29 जून, 06:44–11:29

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी मंगल 28 जून 08:59 से बुध 29 जून 11:29 तक है; हरिवासर 15:36 मंगल पर पूरा होता है। इसलिए पारण बुध 29 जून को सूर्योदय (06:44) से होता है।

नियम

आषाढ़ शुक्ल एकादशी

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।