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Pāthardi, महाराष्ट्र में देवशयनी एकादशी 2035 पारण समय 06:00⁠–⁠09:13, मंगल 17 जुलाई

महाराष्ट्र, भारत

व्रत · समय IST में

Pāthardi में देवशयनी एकादशी 2035 कब है?

सोमवार 16 जुलाई

आषाढ़ शुक्ल एकादशी

स्मार्त · वैष्णव

Pāthardi में सोम 16 जुलाई का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

मंगलवार 17 जुलाई

पारण समय
06:00–09:13
3 घं 13 मि

देवशयनी एकादशी का समय: व्रत, पारण

  • सोमवार 16 जुलाई
  • 06:00व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • मंगलवार 17 जुलाई
  • 06:00–09:13पारण समयव्रत खोलने का समय
Tithika में खोलेंदेवशयनी एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Pāthardi में देवशयनी एकादशी सोम 16 जुलाई को क्यों है?

देवशयनी एकादशी सोम 16 जुलाई को है: एकादशी और द्वादशी दोनों बढ़ी हैं, इसलिए स्मार्त बाद का दिन लेते हैं, और उसका अरुणोदय दशमी से मुक्त है।

दशमी 04:42 तक, अरुणोदय के भीतर; सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 04:42 से 06:52 सोम तक।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 04:42 रवि से 06:52 तक।

द्वादशी: 06:52 सोम से 09:13 तक, अपने दिन से लंबी: यह भी बढ़ी है।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (IST)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं। यह दोनों सूर्योदयों पर है, रवि 15 जुलाई को 05:59 और सोम 16 जुलाई को 06:00। एकादशी (रवि 15 जुलाई 04:42 से सोम 16 जुलाई 06:52 तक) और द्वादशी (सोम 16 जुलाई 06:52 से मंगल 17 जुलाई 09:13 तक) दोनों अपने दिन से लंबी हैं; दोनों बढ़ें तो स्मार्त बाद का दिन लेते हैं: सोम 16 जुलाई। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: रवि 15 जुलाई को दशमी 04:42 तक है, उसके भीतर (04:23–05:59); सोम 16 जुलाई को पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · मंगल 17 जुलाई, 06:00–09:13

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी सोम 16 जुलाई 06:52 से मंगल 17 जुलाई 09:13 तक है; हरिवासर 13:27 सोम पर पूरा होता है। इसलिए पारण मंगल 17 जुलाई को सूर्योदय (06:00) से होता है।

नियम

आषाढ़ शुक्ल एकादशी

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।