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Davinópolis, मरान्हाओ, ब्राज़िल में देवशयनी एकादशी 2034 पारण समय 06:22⁠–⁠18:12, गुरु 27 जुलाई

व्रत · समय UTC−3 में

Davinópolis में देवशयनी एकादशी 2034 कब है?

बुधवार 26 जुलाई

आषाढ़ शुक्ल एकादशी

स्मार्त · वैष्णव

Davinópolis में बुध 26 जुलाई का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

गुरुवार 27 जुलाई

पारण समय
06:22–18:12
11 घं 50 मि · Tithika की परिपाटी

देवशयनी एकादशी का समय: व्रत, पारण

  • बुधवार 26 जुलाई
  • 06:20व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • गुरुवार 27 जुलाई
  • 06:22–18:12पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंदेवशयनी एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Davinópolis में देवशयनी एकादशी बुध 26 जुलाई को क्यों है?

देवशयनी एकादशी बुध 26 जुलाई को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 22:00 मंगल से 23:59 तक।

एकादशी 23:59 बुध पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल बुध 26 जुलाई को सूर्योदय पर है, 06:20: बुध 26 जुलाई। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 22:00 मंगल पर, उससे (04:44–06:20) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · गुरु 27 जुलाई, 06:22–18:12 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी बुध 26 जुलाई 23:59 से शुक्र 28 जुलाई 01:31 तक है; हरिवासर 06:22 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (18:12) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:42 तक, करते हैं।

नियम

आषाढ़ शुक्ल एकादशी

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।