tithika
English

Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में देवशयनी एकादशी 2031 सोम 30 जून या मंगल 1 जुलाई

व्रत · समय UTC−3 में

Ipameri में देवशयनी एकादशी 2031 कब है?

स्मार्त

सोमवार 30 जून

वैष्णव

मंगलवार 1 जुलाई

आषाढ़ शुक्ल एकादशी

Ipameri में सोम 30 जून का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

स्मार्त · मंगलवार 1 जुलाई

पारण समय
10:43–17:49
7 घं 6 मि · Tithika की परिपाटी

वैष्णव · बुधवार 2 जुलाई

पारण समय
06:44–17:49
11 घं 5 मि · Tithika की परिपाटी

देवशयनी एकादशी का समय: व्रत, पारण

स्मार्त

  • सोमवार 30 जून
  • 06:44व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • मंगलवार 1 जुलाई
  • 10:43–17:49पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी

वैष्णव

  • मंगलवार 1 जुलाई
  • 06:44व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • बुधवार 2 जुलाई
  • 06:44–17:49पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंदेवशयनी एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Ipameri में देवशयनी एकादशी सोम 30 जून या मंगल 1 जुलाई को क्यों है?

स्मार्त · स्मार्त परंपरा में देवशयनी एकादशी सोम 30 जून को है: एकादशी किसी सूर्योदय पर नहीं है, और क्षय एकादशी उसी दिन रखी जाती है जिस दिन वह चलती है। वैष्णव मंगल 1 जुलाई को व्रत रखते हैं।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर दशमी; एकादशी 07:26 से। एकादशी: 07:26 से 05:24 मंगल तक।

अरुणोदय में एकादशी केवल 05:24 तक; फिर द्वादशी। एकादशी: 07:26 सोम से 05:24 तक।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं। यह सोम 30 जून को 07:26 पर, उस सूर्योदय (06:44) के बाद, लगती है और मंगल 1 जुलाई को 05:24 पर, अगले सूर्योदय (06:44 मंगल) से पहले, समाप्त होती है: यह किसी सूर्योदय पर नहीं है। क्षय एकादशी उसी दिन रखी जाती है जिस दिन वह चलती है: सोम 30 जून।

वैष्णव

वैष्णव अरुणोदय देखते हैं, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट। सोम 30 जून को अरुणोदय (05:08–06:44) में दशमी है। मंगल 1 जुलाई को उसमें दशमी नहीं (एकादशी 05:24 तक, फिर द्वादशी): मंगल 1 जुलाई।

व्रत का पारण

स्मार्त · मंगल 1 जुलाई, 10:43–17:49 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी मंगल 1 जुलाई 05:24 से बुध 2 जुलाई 02:42 तक है; हरिवासर 10:43 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (17:49) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:57 तक, करते हैं; यहाँ यह समय हरिवासर से पहले समाप्त हो जाता है।

वैष्णव · बुध 2 जुलाई, 06:44–17:49 (त्रयोदशी, सूर्योदय से सूर्यास्त: Tithika की परिपाटी)

द्वादशी बुध 2 जुलाई को 02:42 पर, रात में, अरुणोदय (05:08) से पहले समाप्त होती है: रात में समाप्त द्वादशी को Tithika नहीं गिनता, उसकी परिपाटी। द्वादशी न हो तो निर्णयसिंधु पारण त्रयोदशी में कराता है: सूर्योदय (06:44) से सूर्यास्त (17:49) तक, क्योंकि पारण दिन का कर्म है: Tithika की परिपाटी।

नियम

आषाढ़ शुक्ल एकादशी

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।