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Codcod, पश्चिमी विसाया, फिलिपींस में देवशयनी एकादशी 2030 पारण समय 05:31⁠–⁠18:13, शुक्र 12 जुलाई

व्रत · समय PST में

Codcod में देवशयनी एकादशी 2030 कब है?

गुरुवार 11 जुलाई

आषाढ़ शुक्ल एकादशी

स्मार्त · वैष्णव

Codcod में गुरु 11 जुलाई का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

शुक्रवार 12 जुलाई

पारण समय
05:31–18:13
12 घं 42 मि · Tithika की परिपाटी

देवशयनी एकादशी का समय: व्रत, पारण

  • गुरुवार 11 जुलाई
  • 05:31व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • शुक्रवार 12 जुलाई
  • 05:31–18:13पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंदेवशयनी एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Codcod में देवशयनी एकादशी गुरु 11 जुलाई को क्यों है?

देवशयनी एकादशी गुरु 11 जुलाई को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 01:36 से 22:47 तक।

एकादशी 22:47 गुरु पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC+8)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल गुरु 11 जुलाई को सूर्योदय पर है, 05:31: गुरु 11 जुलाई। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 01:36 पर, उससे (03:55–05:31) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · शुक्र 12 जुलाई, 05:31–18:13 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी गुरु 11 जुलाई 22:47 से शुक्र 12 जुलाई 19:43 तक है; हरिवासर 04:01 पर पूरा होता है। इसलिए पारण शुक्र 12 जुलाई को सूर्योदय (05:31) से होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (18:13) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:04 तक, करते हैं।

नियम

आषाढ़ शुक्ल एकादशी

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।