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साटली, अज़रबैजान में देवशयनी एकादशी 2029 पारण समय 05:36⁠–⁠20:09, रवि 22 जुलाई

व्रत · समय UTC+4 में

साटली में देवशयनी एकादशी 2029 कब है?

शनिवार 21 जुलाई

आषाढ़ शुक्ल एकादशी

स्मार्त · वैष्णव

साटली में शनि 21 जुलाई का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

रविवार 22 जुलाई

पारण समय
05:36–20:09
14 घं 33 मि · Tithika की परिपाटी

देवशयनी एकादशी का समय: व्रत, पारण

  • शनिवार 21 जुलाई
  • 05:35व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • रविवार 22 जुलाई
  • 05:36–20:09पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंदेवशयनी एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

साटली में देवशयनी एकादशी शनि 21 जुलाई को क्यों है?

देवशयनी एकादशी शनि 21 जुलाई को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 00:43 से 22:45 तक।

एकादशी 22:45 शनि पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC+4)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल शनि 21 जुलाई को सूर्योदय पर है, 05:35: शनि 21 जुलाई। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 00:43 पर, उससे (03:59–05:35) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · रवि 22 जुलाई, 05:36–20:09 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी शनि 21 जुलाई 22:45 से रवि 22 जुलाई 20:59 तक है; हरिवासर 04:18 पर पूरा होता है। इसलिए पारण रवि 22 जुलाई को सूर्योदय (05:36) से होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (20:09) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:30 तक, करते हैं।

नियम

आषाढ़ शुक्ल एकादशी

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।