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Codcod, पश्चिमी विसाया, फिलिपींस में देवशयनी एकादशी 2028 पारण समय 08:22⁠–⁠18:13, सोम 3 जुलाई

व्रत · समय PST में

Codcod में देवशयनी एकादशी 2028 कब है?

रविवार 2 जुलाई

आषाढ़ शुक्ल एकादशी

स्मार्त · वैष्णव

Codcod में रवि 2 जुलाई का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

सोमवार 3 जुलाई

पारण समय
08:22–18:13
9 घं 51 मि · Tithika की परिपाटी

देवशयनी एकादशी का समय: व्रत, पारण

  • रविवार 2 जुलाई
  • 05:29व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • सोमवार 3 जुलाई
  • 08:22–18:13पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंदेवशयनी एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Codcod में देवशयनी एकादशी रवि 2 जुलाई को क्यों है?

देवशयनी एकादशी रवि 2 जुलाई को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 03:44 से 02:34 सोम तक।

एकादशी 02:34 पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी। एकादशी: 03:44 रवि से 02:34 तक।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC+8)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल रवि 2 जुलाई को सूर्योदय पर है, 05:29: रवि 2 जुलाई। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 03:44 पर, उससे (03:53–05:29) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · सोम 3 जुलाई, 08:22–18:13 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी सोम 3 जुलाई 02:34 से मंगल 4 जुलाई 01:47 तक है; हरिवासर 08:22 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (18:13) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:02 तक, करते हैं; यहाँ यह समय हरिवासर से पहले समाप्त हो जाता है।

नियम

आषाढ़ शुक्ल एकादशी

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।