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Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में देवशयनी एकादशी 2018 पारण समय 06:42⁠–⁠09:55, मंगल 24 जुलाई

व्रत · समय UTC−3 में

Ipameri में देवशयनी एकादशी 2018 कब है?

सोमवार 23 जुलाई

आषाढ़ शुक्ल एकादशी

स्मार्त · वैष्णव

Ipameri में सोम 23 जुलाई का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

मंगलवार 24 जुलाई

पारण समय
06:42–09:55
3 घं 13 मि

देवशयनी एकादशी का समय: व्रत, पारण

  • सोमवार 23 जुलाई
  • 06:42व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • मंगलवार 24 जुलाई
  • 06:42–09:55पारण समयव्रत खोलने का समय
Tithika में खोलेंदेवशयनी एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Ipameri में देवशयनी एकादशी सोम 23 जुलाई को क्यों है?

देवशयनी एकादशी सोम 23 जुलाई को है: एकादशी और द्वादशी दोनों बढ़ी हैं, इसलिए स्मार्त बाद का दिन लेते हैं, और उसका अरुणोदय दशमी से मुक्त है।

दशमी 06:17 तक, अरुणोदय के भीतर; सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 06:17 से 07:53 सोम तक।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 06:17 रवि से 07:53 तक।

द्वादशी: 07:53 सोम से 09:55 तक, अपने दिन से लंबी: यह भी बढ़ी है।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं। यह दोनों सूर्योदयों पर है, रवि 22 जुलाई को 06:42 और सोम 23 जुलाई को 06:42। एकादशी (रवि 22 जुलाई 06:17 से सोम 23 जुलाई 07:53 तक) और द्वादशी (सोम 23 जुलाई 07:53 से मंगल 24 जुलाई 09:55 तक) दोनों अपने दिन से लंबी हैं; दोनों बढ़ें तो स्मार्त बाद का दिन लेते हैं: सोम 23 जुलाई। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: रवि 22 जुलाई को दशमी 06:17 तक है, उसके भीतर (05:06–06:42); सोम 23 जुलाई को पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · मंगल 24 जुलाई, 06:42–09:55

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी सोम 23 जुलाई 07:53 से मंगल 24 जुलाई 09:55 तक है; हरिवासर 14:24 सोम पर पूरा होता है। इसलिए पारण मंगल 24 जुलाई को सूर्योदय (06:42) से होता है।

नियम

आषाढ़ शुक्ल एकादशी

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।