tithika
English

Sevan, गेघार्कुनिक प्रांत, आर्मेनिया में देवशयनी एकादशी 2017 पारण समय 05:35⁠–⁠20:33, बुध 5 जुलाई

व्रत · समय UTC+4 में

Sevan में देवशयनी एकादशी 2017 कब है?

मंगलवार 4 जुलाई

आषाढ़ शुक्ल एकादशी

स्मार्त · वैष्णव

Sevan में मंगल 4 जुलाई का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

बुधवार 5 जुलाई

पारण समय
05:35–20:33
14 घं 58 मि · Tithika की परिपाटी

देवशयनी एकादशी का समय: व्रत, पारण

  • मंगलवार 4 जुलाई
  • 05:34व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • बुधवार 5 जुलाई
  • 05:35–20:33पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंदेवशयनी एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Sevan में देवशयनी एकादशी मंगल 4 जुलाई को क्यों है?

देवशयनी एकादशी मंगल 4 जुलाई को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 20:45 सोम से 22:59 तक।

एकादशी 22:59 मंगल पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC+4)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल मंगल 4 जुलाई को सूर्योदय पर है, 05:34: मंगल 4 जुलाई। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 20:45 सोम पर, उससे (03:58–05:34) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · बुध 5 जुलाई, 05:35–20:33 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी मंगल 4 जुलाई 22:59 से गुरु 6 जुलाई 01:22 तक है; हरिवासर 05:35 पर पूरा होता है। इसलिए पारण बुध 5 जुलाई को सूर्योदय (05:35) से होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (20:33) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:35 तक, करते हैं।

नियम

आषाढ़ शुक्ल एकादशी

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।