tithika
English

Codcod, पश्चिमी विसाया, फिलिपींस में देवशयनी एकादशी 2017 पारण समय 09:35⁠–⁠18:13, बुध 5 जुलाई

व्रत · समय PST में

Codcod में देवशयनी एकादशी 2017 कब है?

मंगलवार 4 जुलाई

आषाढ़ शुक्ल एकादशी

स्मार्त · वैष्णव

Codcod में मंगल 4 जुलाई का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

बुधवार 5 जुलाई

पारण समय
09:35–18:13
8 घं 38 मि · Tithika की परिपाटी

देवशयनी एकादशी का समय: व्रत, पारण

  • मंगलवार 4 जुलाई
  • 05:29व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • बुधवार 5 जुलाई
  • 09:35–18:13पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंदेवशयनी एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Codcod में देवशयनी एकादशी मंगल 4 जुलाई को क्यों है?

देवशयनी एकादशी मंगल 4 जुलाई को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 00:45 से 02:59 बुध तक।

एकादशी 02:59 पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी। एकादशी: 00:45 मंगल से 02:59 तक।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC+8)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल मंगल 4 जुलाई को सूर्योदय पर है, 05:29: मंगल 4 जुलाई। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 00:45 पर, उससे (03:53–05:29) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · बुध 5 जुलाई, 09:35–18:13 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी बुध 5 जुलाई 02:59 से गुरु 6 जुलाई 05:22 तक है; हरिवासर 09:35 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (18:13) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:02 तक, करते हैं; यहाँ यह समय हरिवासर से पहले समाप्त हो जाता है।

नियम

आषाढ़ शुक्ल एकादशी

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।