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Thazhecode, केरल में देवशयनी एकादशी 2016 पारण समय 08:29⁠–⁠18:53, शनि 16 जुलाई

केरल, भारत

व्रत · समय IST में

Thazhecode में देवशयनी एकादशी 2016 कब है?

शुक्रवार 15 जुलाई

आषाढ़ शुक्ल एकादशी

स्मार्त · वैष्णव

Thazhecode में शुक्र 15 जुलाई का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

शनिवार 16 जुलाई

पारण समय
08:29–18:53
10 घं 24 मि · Tithika की परिपाटी

देवशयनी एकादशी का समय: व्रत, पारण

  • शुक्रवार 15 जुलाई
  • 06:10व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • शनिवार 16 जुलाई
  • 08:29–18:53पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंदेवशयनी एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Thazhecode में देवशयनी एकादशी शुक्र 15 जुलाई को क्यों है?

देवशयनी एकादशी शुक्र 15 जुलाई को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 00:14 से 02:08 शनि तक।

एकादशी 02:08 पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी। एकादशी: 00:14 शुक्र से 02:08 तक।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (IST)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल शुक्र 15 जुलाई को सूर्योदय पर है, 06:10: शुक्र 15 जुलाई। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 00:14 पर, उससे (04:34–06:10) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · शनि 16 जुलाई, 08:29–18:53 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी शनि 16 जुलाई 02:08 से रवि 17 जुलाई 03:32 तक है; हरिवासर 08:29 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (18:53) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:43 तक, करते हैं।

नियम

आषाढ़ शुक्ल एकादशी

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।