tithika
English

Khmelnytskyi, यूक्रेन में देवशयनी एकादशी 2016 पारण समय 05:59⁠–⁠21:11, शनि 16 जुलाई

व्रत · समय EEST में

Khmelnytskyi में देवशयनी एकादशी 2016 कब है?

शुक्रवार 15 जुलाई

आषाढ़ शुक्ल एकादशी

स्मार्त · वैष्णव

Khmelnytskyi में शुक्र 15 जुलाई का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

शनिवार 16 जुलाई

पारण समय
05:59–21:11
15 घं 12 मि · Tithika की परिपाटी

देवशयनी एकादशी का समय: व्रत, पारण

  • शुक्रवार 15 जुलाई
  • 05:22व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • शनिवार 16 जुलाई
  • 05:59–21:11पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंदेवशयनी एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Khmelnytskyi में देवशयनी एकादशी शुक्र 15 जुलाई को क्यों है?

देवशयनी एकादशी शुक्र 15 जुलाई को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 21:44 गुरु से 23:38 तक।

एकादशी 23:38 शुक्र पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC+3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल शुक्र 15 जुलाई को सूर्योदय पर है, 05:22: शुक्र 15 जुलाई। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 21:44 गुरु पर, उससे (03:46–05:22) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · शनि 16 जुलाई, 05:59–21:11 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी शुक्र 15 जुलाई 23:38 से रवि 17 जुलाई 01:02 तक है; हरिवासर 05:59 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (21:11) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:33 तक, करते हैं।

नियम

आषाढ़ शुक्ल एकादशी

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।