Sevan, गेघार्कुनिक प्रांत, आर्मेनिया में देवशयनी एकादशी 2014 मंगल 8 जुलाई या बुध 9 जुलाई
व्रत · समय UTC+4 में
Sevan में देवशयनी एकादशी 2014 कब है?
स्मार्त
मंगलवार 8 जुलाई
वैष्णव
बुधवार 9 जुलाई
आषाढ़ शुक्ल एकादशी
Sevan में मंगल 8 जुलाई का पूरा पंचांगपारण का समय: व्रत कब खोलें?
स्मार्त · बुधवार 9 जुलाई
वैष्णव · गुरुवार 10 जुलाई
देवशयनी एकादशी का समय: व्रत, पारण
स्मार्त
- मंगलवार 8 जुलाई
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05:37व्रत आरंभसूर्योदय पर
- बुधवार 9 जुलाई
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08:39–20:32पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
वैष्णव
- बुधवार 9 जुलाई
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05:37व्रत आरंभसूर्योदय पर
- गुरुवार 10 जुलाई
-
05:38–20:31पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Sevan में देवशयनी एकादशी मंगल 8 जुलाई या बुध 9 जुलाई को क्यों है?
स्मार्त · स्मार्त परंपरा में देवशयनी एकादशी मंगल 8 जुलाई को है: उस दिन सूर्योदय पर एकादशी है। वैष्णव बुध 9 जुलाई को व्रत रखते हैं।
दशमी 04:27 तक, अरुणोदय के भीतर; सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 04:27 से 03:10 बुध तक।
एकादशी 03:10 पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी। एकादशी: 04:27 मंगल से 03:10 तक।
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC+4)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।
स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल मंगल 8 जुलाई को सूर्योदय पर है, 05:37: मंगल 8 जुलाई।
वैष्णव अरुणोदय देखते हैं, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट। मंगल 8 जुलाई को दशमी 04:27 तक है, अरुणोदय (04:01–05:37) के भीतर, इसलिए वह एकादशी विद्ध है। एकादशी 03:10 पर समाप्त होती है, इसलिए वैष्णव बुध 9 जुलाई को व्रत रखते हैं: बुध 9 जुलाई।
व्रत का पारण
स्मार्त · बुध 9 जुलाई, 08:39–20:32 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)
पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी बुध 9 जुलाई 03:10 से गुरु 10 जुलाई 01:05 तक है; हरिवासर 08:39 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (20:32) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:36 तक, करते हैं; यहाँ यह समय हरिवासर से पहले समाप्त हो जाता है।
वैष्णव · गुरु 10 जुलाई, 05:38–20:31 (त्रयोदशी, सूर्योदय से सूर्यास्त: Tithika की परिपाटी)
द्वादशी गुरु 10 जुलाई को 01:05 पर, रात में, अरुणोदय (04:02) से पहले समाप्त होती है: रात में समाप्त द्वादशी को Tithika नहीं गिनता, उसकी परिपाटी। द्वादशी न हो तो निर्णयसिंधु पारण त्रयोदशी में कराता है: सूर्योदय (05:38) से सूर्यास्त (20:31) तक, क्योंकि पारण दिन का कर्म है: Tithika की परिपाटी।
नियम
आषाढ़ शुक्ल एकादशी
एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।
- स्मार्त
- सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
- वैष्णव
- पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
- व्रत का पारण
- द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।