tithika
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Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में देवशयनी एकादशी 2006 गुरु 6 जुलाई या शुक्र 7 जुलाई

व्रत · समय UTC−3 में

Ipameri में देवशयनी एकादशी 2006 कब है?

स्मार्त

गुरुवार 6 जुलाई

वैष्णव

शुक्रवार 7 जुलाई

आषाढ़ शुक्ल एकादशी

Ipameri में गुरु 6 जुलाई का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

स्मार्त · शुक्रवार 7 जुलाई

पारण समय
11:48–17:51
6 घं 3 मि · Tithika की परिपाटी

वैष्णव · शनिवार 8 जुलाई

पारण समय
05:08–05:27
19 मि · Tithika की परिपाटी

देवशयनी एकादशी का समय: व्रत, पारण

स्मार्त

  • गुरुवार 6 जुलाई
  • 06:44व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • शुक्रवार 7 जुलाई
  • 11:48–17:51पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी

वैष्णव

  • शुक्रवार 7 जुलाई
  • 06:44व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • शनिवार 8 जुलाई
  • 05:08–05:27पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंदेवशयनी एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Ipameri में देवशयनी एकादशी गुरु 6 जुलाई या शुक्र 7 जुलाई को क्यों है?

स्मार्त · स्मार्त परंपरा में देवशयनी एकादशी गुरु 6 जुलाई को है: उस दिन सूर्योदय पर एकादशी है। वैष्णव शुक्र 7 जुलाई को व्रत रखते हैं।

दशमी 05:35 तक, अरुणोदय के भीतर; सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 05:35 से 05:55 शुक्र तक।

अरुणोदय में एकादशी केवल 05:55 तक; फिर द्वादशी। एकादशी: 05:35 गुरु से 05:55 तक।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल गुरु 6 जुलाई को सूर्योदय पर है, 06:44: गुरु 6 जुलाई।

वैष्णव

वैष्णव अरुणोदय देखते हैं, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट। गुरु 6 जुलाई को दशमी 05:35 तक है, अरुणोदय (05:08–06:44) के भीतर, इसलिए वह एकादशी विद्ध है। एकादशी 05:55 पर समाप्त होती है, इसलिए वैष्णव शुक्र 7 जुलाई को व्रत रखते हैं: शुक्र 7 जुलाई।

व्रत का पारण

स्मार्त · शुक्र 7 जुलाई, 11:48–17:51 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी शुक्र 7 जुलाई 05:55 से शनि 8 जुलाई 05:27 तक है; हरिवासर 11:48 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (17:51) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:57 तक, करते हैं; यहाँ यह समय हरिवासर से पहले समाप्त हो जाता है।

वैष्णव · शनि 8 जुलाई, 05:08–05:27 (अरुणोदय से, Tithika की परिपाटी)

द्वादशी शनि 8 जुलाई को 05:27 पर, अरुणोदय (05:08) लगने के बाद और सूर्योदय (06:44) से पहले, समाप्त होती है। द्वादशी छोटी हो तो निर्णयसिंधु, मत्स्य पुराण के अनुसार, पारण भोर में, द्वादशी समाप्त होने से पहले कराता है। Tithika इसे अरुणोदय से आरंभ करता है: Tithika की परिपाटी।

नियम

आषाढ़ शुक्ल एकादशी

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।