Sevan, गेघार्कुनिक प्रांत, आर्मेनिया में देवशयनी एकादशी 2005 रवि 17 जुलाई या सोम 18 जुलाई
व्रत · समय UTC+5 में
Sevan में देवशयनी एकादशी 2005 कब है?
स्मार्त
रविवार 17 जुलाई
वैष्णव
सोमवार 18 जुलाई
आषाढ़ शुक्ल एकादशी
Sevan में रवि 17 जुलाई का पूरा पंचांगपारण का समय: व्रत कब खोलें?
स्मार्त · सोमवार 18 जुलाई
वैष्णव · मंगलवार 19 जुलाई
देवशयनी एकादशी का समय: व्रत, पारण
स्मार्त
- रविवार 17 जुलाई
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06:43व्रत आरंभसूर्योदय पर
- सोमवार 18 जुलाई
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10:42–21:27पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
वैष्णव
- सोमवार 18 जुलाई
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06:44व्रत आरंभसूर्योदय पर
- मंगलवार 19 जुलाई
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06:45–21:26पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Sevan में देवशयनी एकादशी रवि 17 जुलाई या सोम 18 जुलाई को क्यों है?
स्मार्त · स्मार्त परंपरा में देवशयनी एकादशी रवि 17 जुलाई को है: एकादशी किसी सूर्योदय पर नहीं है, और क्षय एकादशी उसी दिन रखी जाती है जिस दिन वह चलती है। वैष्णव सोम 18 जुलाई को व्रत रखते हैं।
पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर दशमी; एकादशी 07:14 से। एकादशी: 07:14 से 05:21 सोम तक।
अरुणोदय में एकादशी केवल 05:21 तक; फिर द्वादशी। एकादशी: 07:14 रवि से 05:21 तक।
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC+5)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।
स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं। यह रवि 17 जुलाई को 07:14 पर, उस सूर्योदय (06:43) के बाद, लगती है और सोम 18 जुलाई को 05:21 पर, अगले सूर्योदय (06:44 सोम) से पहले, समाप्त होती है: यह किसी सूर्योदय पर नहीं है। क्षय एकादशी उसी दिन रखी जाती है जिस दिन वह चलती है: रवि 17 जुलाई।
वैष्णव अरुणोदय देखते हैं, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट। रवि 17 जुलाई को अरुणोदय (05:07–06:43) में दशमी है। सोम 18 जुलाई को उसमें दशमी नहीं (एकादशी 05:21 तक, फिर द्वादशी): सोम 18 जुलाई।
व्रत का पारण
स्मार्त · सोम 18 जुलाई, 10:42–21:27 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)
पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी सोम 18 जुलाई 05:21 से मंगल 19 जुलाई 02:44 तक है; हरिवासर 10:42 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (21:27) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 09:41 तक, करते हैं; यहाँ यह समय हरिवासर से पहले समाप्त हो जाता है।
वैष्णव · मंगल 19 जुलाई, 06:45–21:26 (त्रयोदशी, सूर्योदय से सूर्यास्त: Tithika की परिपाटी)
द्वादशी मंगल 19 जुलाई को 02:44 पर, रात में, अरुणोदय (05:09) से पहले समाप्त होती है: रात में समाप्त द्वादशी को Tithika नहीं गिनता, उसकी परिपाटी। द्वादशी न हो तो निर्णयसिंधु पारण त्रयोदशी में कराता है: सूर्योदय (06:45) से सूर्यास्त (21:26) तक, क्योंकि पारण दिन का कर्म है: Tithika की परिपाटी।
नियम
आषाढ़ शुक्ल एकादशी
एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।
- स्मार्त
- सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
- वैष्णव
- पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
- व्रत का पारण
- द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।