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Sevan, गेघार्कुनिक प्रांत, आर्मेनिया में देवशयनी एकादशी 1990 पारण समय 06:34⁠–⁠21:33, बुध 4 जुलाई

व्रत · समय UTC+5 में

Sevan में देवशयनी एकादशी 1990 कब है?

मंगलवार 3 जुलाई

आषाढ़ शुक्ल एकादशी

स्मार्त · वैष्णव

Sevan में मंगल 3 जुलाई का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

बुधवार 4 जुलाई

पारण समय
06:34–21:33
14 घं 59 मि · Tithika की परिपाटी

देवशयनी एकादशी का समय: व्रत, पारण

  • मंगलवार 3 जुलाई
  • 06:33व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • बुधवार 4 जुलाई
  • 06:34–21:33पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंदेवशयनी एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Sevan में देवशयनी एकादशी मंगल 3 जुलाई को क्यों है?

देवशयनी एकादशी मंगल 3 जुलाई को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 20:07 सोम से 22:30 तक।

एकादशी 22:30 मंगल पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC+5)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल मंगल 3 जुलाई को सूर्योदय पर है, 06:33: मंगल 3 जुलाई। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 20:07 सोम पर, उससे (04:57–06:33) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · बुध 4 जुलाई, 06:34–21:33 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी मंगल 3 जुलाई 22:30 से गुरु 5 जुलाई 00:50 तक है; हरिवासर 05:05 पर पूरा होता है। इसलिए पारण बुध 4 जुलाई को सूर्योदय (06:34) से होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (21:33) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 09:34 तक, करते हैं।

नियम

आषाढ़ शुक्ल एकादशी

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।