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Pāthardi, महाराष्ट्र में देवशयनी एकादशी 1985 शुक्र 28 जून या शनि 29 जून

महाराष्ट्र, भारत

व्रत · समय IST में

Pāthardi में देवशयनी एकादशी 1985 कब है?

स्मार्त

शुक्रवार 28 जून

वैष्णव

शनिवार 29 जून

आषाढ़ शुक्ल एकादशी

Pāthardi में शुक्र 28 जून का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

स्मार्त · शनिवार 29 जून

पारण समय
09:20–19:10
9 घं 50 मि · Tithika की परिपाटी

वैष्णव · रविवार 30 जून

पारण समय
05:54–19:10
13 घं 16 मि · Tithika की परिपाटी

देवशयनी एकादशी का समय: व्रत, पारण

स्मार्त

  • शुक्रवार 28 जून
  • 05:53व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • शनिवार 29 जून
  • 09:20–19:10पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी

वैष्णव

  • शनिवार 29 जून
  • 05:54व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • रविवार 30 जून
  • 05:54–19:10पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंदेवशयनी एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Pāthardi में देवशयनी एकादशी शुक्र 28 जून या शनि 29 जून को क्यों है?

स्मार्त · स्मार्त परंपरा में देवशयनी एकादशी शुक्र 28 जून को है: एकादशी किसी सूर्योदय पर नहीं है, और क्षय एकादशी उसी दिन रखी जाती है जिस दिन वह चलती है। वैष्णव शनि 29 जून को व्रत रखते हैं।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर दशमी; एकादशी 06:38 से। एकादशी: 06:38 से 04:00 शनि तक।

एकादशी 04:00 पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी। एकादशी: 06:38 शुक्र से 04:00 तक।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (IST)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं। यह शुक्र 28 जून को 06:38 पर, उस सूर्योदय (05:53) के बाद, लगती है और शनि 29 जून को 04:00 पर, अगले सूर्योदय (05:54 शनि) से पहले, समाप्त होती है: यह किसी सूर्योदय पर नहीं है। क्षय एकादशी उसी दिन रखी जाती है जिस दिन वह चलती है: शुक्र 28 जून।

वैष्णव

वैष्णव अरुणोदय देखते हैं, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट। शुक्र 28 जून को अरुणोदय (04:17–05:53) में दशमी है। शनि 29 जून को उसमें दशमी नहीं (एकादशी 04:00 तक, फिर द्वादशी): शनि 29 जून।

व्रत का पारण

स्मार्त · शनि 29 जून, 09:20–19:10 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी शनि 29 जून 04:00 से रवि 30 जून 01:17 तक है; हरिवासर 09:20 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (19:10) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:33 तक, करते हैं; यहाँ यह समय हरिवासर से पहले समाप्त हो जाता है।

वैष्णव · रवि 30 जून, 05:54–19:10 (त्रयोदशी, सूर्योदय से सूर्यास्त: Tithika की परिपाटी)

द्वादशी रवि 30 जून को 01:17 पर, रात में, अरुणोदय (04:18) से पहले समाप्त होती है: रात में समाप्त द्वादशी को Tithika नहीं गिनता, उसकी परिपाटी। द्वादशी न हो तो निर्णयसिंधु पारण त्रयोदशी में कराता है: सूर्योदय (05:54) से सूर्यास्त (19:10) तक, क्योंकि पारण दिन का कर्म है: Tithika की परिपाटी।

नियम

आषाढ़ शुक्ल एकादशी

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।