tithika
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Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में देवशयनी एकादशी 1964 पारण समय 10:33⁠–⁠17:55, सोम 20 जुलाई

व्रत · समय UTC−3 में

Ipameri में देवशयनी एकादशी 1964 कब है?

रविवार 19 जुलाई

आषाढ़ शुक्ल एकादशी

स्मार्त · वैष्णव

Ipameri में रवि 19 जुलाई का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

सोमवार 20 जुलाई

पारण समय
10:33–17:55
7 घं 22 मि · Tithika की परिपाटी

देवशयनी एकादशी का समय: व्रत, पारण

  • रविवार 19 जुलाई
  • 06:43व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • सोमवार 20 जुलाई
  • 10:33–17:55पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंदेवशयनी एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Ipameri में देवशयनी एकादशी रवि 19 जुलाई को क्यों है?

देवशयनी एकादशी रवि 19 जुलाई को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 01:25 से 03:55 सोम तक।

एकादशी 03:55 पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी। एकादशी: 01:25 रवि से 03:55 तक।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल रवि 19 जुलाई को सूर्योदय पर है, 06:43: रवि 19 जुलाई। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 01:25 पर, उससे (05:07–06:43) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · सोम 20 जुलाई, 10:33–17:55 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी सोम 20 जुलाई 03:55 से मंगल 21 जुलाई 06:29 तक है; हरिवासर 10:33 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (17:55) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:57 तक, करते हैं; यहाँ यह समय हरिवासर से पहले समाप्त हो जाता है।

नियम

आषाढ़ शुक्ल एकादशी

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।