Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में देवशयनी एकादशी 1944 शनि 1 जुलाई या रवि 2 जुलाई
व्रत · समय UTC−3 में
Ipameri में देवशयनी एकादशी 1944 कब है?
स्मार्त
शनिवार 1 जुलाई
वैष्णव
रविवार 2 जुलाई
आषाढ़ शुक्ल एकादशी
Ipameri में शनि 1 जुलाई का पूरा पंचांगपारण का समय: व्रत कब खोलें?
स्मार्त · रविवार 2 जुलाई
वैष्णव · सोमवार 3 जुलाई
देवशयनी एकादशी का समय: व्रत, पारण
स्मार्त
- शनिवार 1 जुलाई
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06:43व्रत आरंभसूर्योदय पर
- रविवार 2 जुलाई
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12:29–17:49पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
वैष्णव
- रविवार 2 जुलाई
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06:44व्रत आरंभसूर्योदय पर
- सोमवार 3 जुलाई
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05:08–06:13पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Ipameri में देवशयनी एकादशी शनि 1 जुलाई या रवि 2 जुलाई को क्यों है?
स्मार्त · स्मार्त परंपरा में देवशयनी एकादशी शनि 1 जुलाई को है: उस दिन सूर्योदय पर एकादशी है। वैष्णव रवि 2 जुलाई को व्रत रखते हैं।
दशमी 06:12 तक, अरुणोदय के भीतर; सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 06:12 से 06:34 रवि तक।
अरुणोदय में एकादशी केवल 06:34 तक; फिर द्वादशी। एकादशी: 06:12 शनि से 06:34 तक।
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।
स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल शनि 1 जुलाई को सूर्योदय पर है, 06:43: शनि 1 जुलाई।
वैष्णव अरुणोदय देखते हैं, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट। शनि 1 जुलाई को दशमी 06:12 तक है, अरुणोदय (05:07–06:43) के भीतर, इसलिए वह एकादशी विद्ध है। एकादशी 06:34 पर समाप्त होती है, इसलिए वैष्णव रवि 2 जुलाई को व्रत रखते हैं: रवि 2 जुलाई।
व्रत का पारण
स्मार्त · रवि 2 जुलाई, 12:29–17:49 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)
पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी रवि 2 जुलाई 06:34 से सोम 3 जुलाई 06:13 तक है; हरिवासर 12:29 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (17:49) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:57 तक, करते हैं; यहाँ यह समय हरिवासर से पहले समाप्त हो जाता है।
वैष्णव · सोम 3 जुलाई, 05:08–06:13 (अरुणोदय से, Tithika की परिपाटी)
द्वादशी सोम 3 जुलाई को 06:13 पर, अरुणोदय (05:08) लगने के बाद और सूर्योदय (06:44) से पहले, समाप्त होती है। द्वादशी छोटी हो तो निर्णयसिंधु, मत्स्य पुराण के अनुसार, पारण भोर में, द्वादशी समाप्त होने से पहले कराता है। Tithika इसे अरुणोदय से आरंभ करता है: Tithika की परिपाटी।
नियम
आषाढ़ शुक्ल एकादशी
एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।
- स्मार्त
- सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
- वैष्णव
- पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
- व्रत का पारण
- द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।